तेहरान/विश्व – ईरान पर संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के गहरे सैन्य हमले के बाद अयातुल्ला अली खामनेई, ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत की खबर आधिकारिक तौर पर सामने आ गई है। यह हमला 28-29 फरवरी की रात को हुए संयुक्त अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसे अमेरिका-इजरायल की ओर से ऑपरेशन एपिक फ्यूरि नाम दिया गया था।
इजरायल और अमेरिका दोनों ने खामनेई के मरने की पुष्टि की है और ईरानी सरकारी टीवी ने भी उनकी मृत्यु की पुष्टि करते हुए 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया है।
अब ईरान का नेता कौन होगा? अस्थायी नेतृत्व और भविष्य
ईरान का संविधान यह तय करता है कि अगर सुप्रीम लीडर के पद पर अचानक खालीपन आ जाए, तो एक अस्थायी नेतृत्व काउंसिल देश के कार्यभार को संभालेगी, जब तक कि स्थायी उत्तराधिकारी चुना न जाए।
इस अस्थायी काउंसिल में शामिल होंगे:
• ईरान के राष्ट्रपति (Masoud Pezeshkian)
• ईरान के मुख्य न्यायाधीश
• एक चुना गया धर्मगुरु प्रतिनिधि (Guardian Council से)
ये तीनों मिलकर सुप्रीम लीडर के सभी संवैधानिक कार्यों को समयांतरिम रूप से निभाएंगे।
इसके साथ ही एक 88 सदस्यीय ‘एक्सपर्ट्स की सभा’ (Assembly of Experts) जल्द से जल्द नए सुप्रीम लीडर का चुनाव करेगी जो स्थायी रूप से ईरान का नेतृत्व संभालेगा।
राजनीतिक अस्थिरता और भविष्य के संकेत
• कई नाम संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर चर्चा में हैं, जिनमें धार्मिक और राजनीतिक नेताओं के नाम शामिल हो सकते हैं।
• ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई आईआरजीसी (IRGC) अब भी प्रभावी भूमिका निभा सकती है और राजनीतिक घटनाक्रम को प्रभावित कर सकती है।
इस बीच, ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सघन जवाबी हमले की धमकी दी है, जिससे सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और तनाव की गहराई
दुनिया भर के देश, संयुक्त राष्ट्र और खुफिया एजेंसियाँ इस घटना को एक गंभीर भू-राजनैतिक मोड़ के रूप में देख रही हैं। तैलीय बाजार से लेकर मध्य-पूर्व सुरक्षा तक कई क्षेत्रों में प्रभाव महसूस किया जा रहा है।









