कांग्रेस नेता और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता Pawan Khera को एक मामले में बड़ी राहत मिली है। तेलंगाना हाई कोर्ट ने उन्हें एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत (प्री-अरेस्ट बेल) प्रदान की है। यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने असम के मुख्यमंत्री और उनके परिवार को लेकर टिप्पणी की थी।
यह आदेश जस्टिस के. सुजाना की एकल पीठ ने दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि भले ही एफआईआर असम में दर्ज हुई हो, लेकिन अंतरराज्यीय मामलों में ट्रांजिट बेल देने का अधिकार अदालत के पास है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सीमित अवधि के लिए राहत दी जा सकती है।
अदालत ने यह भी माना कि Pawan Khera को गिरफ्तारी का वास्तविक खतरा था। विशेष रूप से तब, जब उनके दिल्ली स्थित आवास पर असम और दिल्ली पुलिस द्वारा सर्च और जब्ती की कार्रवाई की गई थी। इस आधार पर अदालत ने उन्हें अस्थायी राहत देना उचित समझा।
पूरा मामला 4 अप्रैल को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है, जिसमें खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं। इसके अलावा उन्होंने कुछ अवैध गतिविधियों में शामिल होने के आरोप भी लगाए थे।
इन बयानों के बाद गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर असम पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एफआईआर दर्ज की। इसके बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया और जांच एजेंसियां सक्रिय हो गईं।
तेलंगाना हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह राहत केवल अस्थायी है और इसका उद्देश्य Pawan Khera को संबंधित अदालत में नियमित अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने का समय देना है। कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि वे सात दिनों के भीतर असम की सक्षम अदालत में याचिका दायर करें।
इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे न्याय की जीत बताया है, जबकि विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।









