बिहार की राजनीति में मंगलवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला, जब लंबे समय तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे Nitish Kumar ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के साथ ही राज्य में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत हो गई है, जहां अब पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने नेतृत्व में सरकार बनाने जा रही है।
करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार ने राज्यपाल Syed Ata Hasnain को अपना इस्तीफा सौंपा। इस्तीफे से पहले उन्होंने सुबह 11 बजे कैबिनेट की अंतिम बैठक की अध्यक्षता की और उसके बाद औपचारिक रूप से पद छोड़ दिया। उनके इस फैसले के साथ ही उनकी सरकार भी भंग हो गई।
नीतीश कुमार, जो जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख हैं, हाल ही में राज्यसभा सांसद बने हैं। 10 अप्रैल को उन्होंने संसद के उच्च सदन की सदस्यता की शपथ ली थी, जिससे यह साफ संकेत मिल गया था कि वे अब सक्रिय राज्य राजनीति से दूरी बनाने जा रहे हैं। 75 वर्ष की उम्र में वे बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री रहे हैं और उन्होंने रिकॉर्ड दस बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
इधर, विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा ने सरकार बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। 243 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 89 विधायक हैं। पार्टी ने अपने विधायक दल की बैठक बुलाई, जिसमें नए नेता का चयन किया गया। इस बीच, उपमुख्यमंत्री Samrat Chaudhary को मुख्यमंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।
नए मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद का शपथ ग्रहण समारोह 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे राजभवन में आयोजित किया जाएगा। यह पहली बार होगा जब बिहार में भाजपा अपने दम पर मुख्यमंत्री पद संभालेगी, जो राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने अपने करियर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन—दोनों के साथ सरकार चलाई। उनके कार्यकाल में कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की गईं, जिनमें लड़कियों के लिए साइकिल योजना और राज्य में शराबबंदी नीति प्रमुख रही। इन योजनाओं ने खासकर महिला मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ बनाई।








