वैश्विक अस्थिरता और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मार्च महीने में देश का व्यापार घाटा घटकर पिछले नौ महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा लागत पर दबाव बना हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में भारत का व्यापार घाटा घटकर 20.67 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले फरवरी में यह आंकड़ा इससे अधिक था। इस दौरान देश के निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि आयात में कमी देखने को मिली। मार्च में कुल निर्यात बढ़कर 38.92 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले महीने के 36.61 अरब डॉलर के मुकाबले ज्यादा है। वहीं आयात घटकर 59.59 अरब डॉलर पर आ गया, जो पहले 63.71 अरब डॉलर था।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस सुधार के पीछे सबसे बड़ा कारण संयुक्त राज्य अमेरिका को होने वाले निर्यात में तेज वृद्धि है। अमेरिका को भारत का निर्यात मार्च में करीब 17.4 प्रतिशत बढ़कर 8.02 अरब डॉलर हो गया। यह वृद्धि खासतौर पर टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण हुई है।
बताया जा रहा है कि अमेरिका में हाल ही में कुछ टैरिफ कम किए गए हैं, जिससे भारतीय उत्पादों को वहां प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिली है। पहले जहां कई वस्तुओं पर भारी शुल्क लगाया गया था, अब उसमें राहत मिलने से भारतीय निर्यातकों को फायदा हुआ है।
हालांकि, दूसरी ओर ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इसके कारण शिपिंग लागत बढ़ी है और कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इन परिस्थितियों का असर भारत के आयात बिल पर भी पड़ा है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि भारत के निर्यात क्षेत्र पर फिलहाल दो विपरीत ताकतें काम कर रही हैं। एक तरफ वैश्विक तनाव और महंगी लॉजिस्टिक्स लागत चुनौतियां पैदा कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में मांग बढ़ने से राहत मिल रही है।
आगे आने वाले महीनों में भारत के व्यापार संतुलन पर काफी कुछ वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। यदि अमेरिका में मांग बनी रहती है और अन्य प्रमुख बाजारों में भी सुधार होता है, तो भारत के निर्यात को और मजबूती मिल सकती है। वहीं, मध्य पूर्व में जारी तनाव लंबा खिंचता है तो इसका असर फिर से आयात और व्यापार घाटे पर पड़ सकता है।








