देश में संभावित व्यापार समझौतों को लेकर किसानों के बीच उठ रही आशंकाओं पर अमूल के प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ता में एकतरफा फैसले नहीं होते। उन्होंने कहा कि व्यापार वार्ता हमेशा दो-तरफा प्रक्रिया होती है, जिसमें सभी हितधारकों—खासकर किसानों—के हितों का ध्यान रखा जाता है।
अमूल प्रमुख ने जोर देकर कहा कि डेयरी और कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और सरकार व उद्योग दोनों इस बात को समझते हैं कि किसानों की आजीविका से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों के हितों को प्रभावित करने वाला कोई भी कदम बिना व्यापक विचार-विमर्श के नहीं उठाया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की डेयरी व्यवस्था सहकारी मॉडल पर आधारित है, जिसमें किसानों की सीधी भागीदारी होती है। ऐसे में किसी भी व्यापार समझौते का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाता है कि उससे घरेलू उत्पादन, कीमतों और किसानों की आय पर क्या असर पड़ेगा।
अमूल प्रमुख के अनुसार, भारत की कृषि और डेयरी प्रणाली वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने में सक्षम है, बशर्ते नीतिगत संतुलन बना रहे। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और तथ्यों के आधार पर भरोसा रखें।
अंत में उन्होंने कहा कि सरकार, सहकारी संस्थाएं और किसान संगठन मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि व्यापार नीतियां देश के किसानों के हितों के अनुरूप ही तय हों और किसी भी समझौते में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहेगा।
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