जब आकाश से हरियाली का संदेश उतरा…
धूप खिली हुई है। मैदानों की अपेक्षा यहां का मौसम बेहद सुहावना और तरोताजा है। हरेला का उत्सव पूरे उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। चारों ओर हरियाली की चादर बिछी हुई है और वातावरण उत्साह से सराबोर है। प्रकृति की गोद से बहती मंद-मंद हवा अपने साथ औषधीय पौधों की भीनी-भीनी खुशबू लेकर आती है। ऐसा लगता है मानो प्रकृति स्वयं इस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनने के लिए सजी-धजी खड़ी हो।
तभी अचानक इस शांत वातावरण को चीरती हुई आसमान में एक हेलिकॉप्टर की आवाज गूंजती है। सभी की निगाहें सहज ही आकाश की ओर उठ जाती हैं। हेलिकॉप्टर धीरे-धीरे अस्थायी हेलिपैड की ओर उतरने लगता है। पूरे परिसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम हैं। उत्तराखंड पुलिस, विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों के अधिकारी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
कुछ ही क्षणों बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हेलिकॉप्टर से उतरते हैं। उनके स्वागत के लिए योगगुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण मुस्कुराते हुए आगे बढ़ते हैं। आत्मीय अभिवादन और संक्षिप्त बातचीत के बाद तीनों ‘श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड हिमालय’ के निर्माण स्थल की ओर बढ़ते हैं। यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के भविष्य को नई दिशा देने और देश की हजारों वर्षों पुरानी आयुर्वेदिक विरासत को संरक्षित करने का एक दूरदर्शी प्रयास है।
स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण मुख्यमंत्री को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हैं। वे बताते हैं कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल औषधीय पौधों का संरक्षण करना नहीं है, बल्कि पौधों, भारतीय सभ्यता, संस्कृति, विज्ञान और पर्यावरण को एक साझा मंच पर लाकर मानव स्वास्थ्य को अधिक स्थायी, संतुलित और समृद्ध बनाना है। उनके अनुसार यह धाम आने वाले समय में प्रकृति और विज्ञान के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करेगा।

एक धाम केवल एक बगिया नहीं, बल्कि एक जीवित ज्ञानकोश है
भ्रमण के दौरान शुरुआत में कोई भी व्यक्ति इसे एक विशाल बॉटनिकल गार्डन समझ सकता है। लेकिन जो इसकी गहराई को समझने के लिए तैयार हैं, वे जल्द ही महसूस करेंगे कि यह स्थान केवल हरियाली का विस्तार नहीं, बल्कि हजारों वर्षों के ज्ञान, अनुसंधान और भारतीय चिकित्सा परंपरा का जीवंत खजाना है।
स्वामी रामदेव मुख्यमंत्री धामी को बताते हैं कि ‘श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड हिमालय’ विश्व का पहला ऐसा जीवंत हर्बल गार्डन है, जहां अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों की दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों को संरक्षित और विकसित किया जा रहा है। यहां केवल पौधों का संग्रह नहीं किया गया है, बल्कि उनके पीछे छिपे वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और औषधीय ज्ञान को भी सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है।
वे आगे कहते हैं—
“यह केवल पौधों का केंद्र नहीं है। यह वैश्विक स्वास्थ्य और पर्यावरण जागरूकता का एक आंदोलन है। यदि हम प्रकृति की रक्षा करेंगे, तभी प्रकृति भी हमारी रक्षा करेगी।”
मुख्यमंत्री परियोजना स्थल का निरीक्षण करते हुए आगे बढ़ते रहते हैं। हर कुछ कदम पर उन्हें कोई नई औषधीय प्रजाति, नई वनस्पति और उसके साथ जुड़ी एक नई कहानी दिखाई देती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरा परिसर भारतीय आयुर्वेद की हजारों वर्षों पुरानी विरासत को जीवंत रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा हो।
हर पौधे के पीछे हजारों वर्षों की सभ्यता संजोई हुई है
धाम की यात्रा आगे बढ़ती है और हर कदम के साथ यह एहसास और गहरा होता जाता है कि यह केवल एक हरित परिसर नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का जीवंत स्वरूप है। यहां दुर्लभ हिमालयी औषधीय पौधों से लेकर रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाई जाने वाली वनस्पतियां, विभिन्न प्रकार के फलदार पौधे और प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित अनमोल जड़ी-बूटियां वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित की जा रही हैं।

प्रकृति और विज्ञान का यह अद्भुत संगम इस बात का प्रमाण है कि भारतीय चिकित्सा पद्धति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का भी एक महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।
आचार्य बालकृष्ण इस परियोजना के पीछे की सोच को विस्तार से समझाते हैं। उनका कहना है कि यह केवल औषधीय पौधों का संग्रह नहीं है, बल्कि वनस्पति विज्ञान, चिकित्सा इतिहास, प्राचीन एवं समकालीन ज्ञान, अनुसंधान और वैश्विक स्वास्थ्य दृष्टिकोण का एक समग्र केंद्र है।
वे बताते हैं कि यहां प्रत्येक पौधे का महत्व केवल उसके औषधीय गुणों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके साथ जुड़ी सांस्कृतिक विरासत, वैज्ञानिक शोध और ऐतिहासिक महत्व को भी समान रूप से संरक्षित किया जा रहा है।
करीब 200 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित हो रहा यह धाम भविष्य में आयुर्वेद चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला का रूप लेगा।
यहां विकसित किया जा रहा ज्ञान पार्क केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि ऐसा अनुभवात्मक केंद्र बनेगा जहां लोग पौधों को देखकर, समझकर और उनके साथ जुड़कर उनके औषधीय एवं वैज्ञानिक महत्व का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
जब आयुर्वेद से अन्य चिकित्सा प्रणालियों ने संवाद किया
परियोजना के भ्रमण के दौरान आचार्य बालकृष्ण एक विशेष स्थान पर रुकते हैं और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस हर्बल वर्ल्ड की एक अनूठी विशेषता के बारे में विस्तार से बताते हैं।
वे समझाते हैं कि ‘श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड हिमालय’ केवल भारतीय आयुर्वेद तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी, चीनी, जापानी, कोरियाई, होम्योपैथी, ग्रीक और तिब्बती जैसी प्रमुख वनस्पति-आधारित चिकित्सा प्रणालियों का समेकन किया गया है। इसके साथ ही यह धाम लगभग 964 चिकित्सा विज्ञानों की अवधारणा को भी समेटे हुए है।
आचार्य बालकृष्ण बताते हैं कि यह केवल विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि साझा मानव सभ्यता के उस ज्ञान का जीवंत संग्रह है, जिसने हजारों वर्षों के विकासक्रम में मानवता को स्वास्थ्य, संतुलन और प्राकृतिक उपचार का मार्ग दिखाया है।
उनके अनुसार यह धाम वह स्थान है जहां अतीत और भविष्य का मिलन होता है, जहां परंपरा आधुनिक विज्ञान से संवाद करती है और जहां अध्यात्म तथा वैज्ञानिक सोच मिलकर मानव कल्याण की नई संभावनाओं को जन्म देते हैं।
उत्तराखंड का भविष्य मुख्यमंत्री की नजरों में
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भ्रमण के दौरान कई स्थानों पर रुकते हैं। वे विभिन्न औषधीय पौधों का बारीकी से निरीक्षण करते हैं, उनके औषधीय गुणों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं और परियोजना के प्रत्येक पहलू को गंभीरता से समझने का प्रयास करते हैं।
यह दौरा केवल निर्माण कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन नहीं लगता, बल्कि उत्तराखंड की नई पहचान गढ़ने और हिमालय की जैव विविधता तथा आयुर्वेदिक विरासत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की संभावनाओं का अवलोकन भी प्रतीत होता है।
मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि ‘श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड हिमालय’ भगवान धन्वंतरि को समर्पित सच्ची श्रद्धांजलि है। उनके अनुसार यह केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक अनूठा और दूरदर्शी प्रयास है।
वे विश्वास व्यक्त करते हैं कि आने वाले समय में यह धाम दुनिया भर के शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा, जहां ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के नए आयाम विकसित होंगे।
मुख्यमंत्री के अनुसार यह परियोजना उत्तराखंड को विश्व पटल पर ‘औषधीय राज्य’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। साथ ही यह राज्य को आयुर्वेद, जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण, अनुसंधान और हर्बल नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने की क्षमता रखती है।
यह अब केवल वृक्षारोपण का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि भविष्य के भारत और उत्तराखंड की नई पहचान का संकल्प बन चुका है।
यात्रा के बाद अब वृक्षारोपण स्थलों की ओर जाना था

हरेला पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, योगगुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लेते हैं।
कुछ ही देर में यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रह जाता, बल्कि प्रकृति संरक्षण का एक सामूहिक संकल्प बन जाता है। सैकड़ों हाथ एक साथ धरती से जुड़ते हैं और विभिन्न प्रजातियों के पौधे मिट्टी की गोद में रोपे जाते हैं।
ऐसा प्रतीत होता है मानो इन पौधों की जड़ें स्वयं हरेला पर्व का संदेश गुनगुना रही हों—हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य का संदेश।
स्वामी रामदेव का सपना—स्वास्थ्य और प्रकृति के लिए एक वैश्विक आंदोलन
स्वामी रामदेव के लिए ‘श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड हिमालय’ केवल एक संस्थागत परियोजना नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के बीच टूटते संबंधों को पुनः स्थापित करने का एक वैश्विक आंदोलन है।
उनका मानना है कि स्थानीय संसाधनों, स्वदेशी ज्ञान, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के समन्वय पर आधारित विकास मॉडल न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बन सकता है।
वे इस परियोजना को स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक जीवनशैली का ऐसा अभियान मानते हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के साथ दोबारा जोड़ने का कार्य करेगा।
आचार्य बालकृष्ण का दृष्टिकोण—ज्ञान, रोजगार और वैश्विक नेतृत्व
आचार्य बालकृष्ण के लिए यह धाम कई दशकों के अध्ययन, शोध और अनुभव का परिणाम है। उनका दृष्टिकोण केवल औषधीय पौधों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इसे भारत की प्राचीन चिकित्सा विरासत के वैश्विक पुनर्जागरण का केंद्र मानते हैं।
उनके अनुसार यह परियोजना उत्तराखंड के युवाओं के लिए हर्बल पर्यटन, जैव-विविधता आधारित अर्थव्यवस्था, अनुसंधान, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।
भविष्य में यहां देश-विदेश के विद्यार्थी, वैज्ञानिक और शोधकर्ता प्रकृति तथा आधुनिक विज्ञान के बीच मौजूद जीवंत संबंधों को समझने और उन पर अनुसंधान करने के लिए आएंगे।
यह केवल एक पवित्र स्थल नहीं होगा, बल्कि भविष्य के भारत की हरित पहचान, वैज्ञानिक सोच और आयुर्वेदिक विरासत का सशक्त प्रतीक बनेगा।
इसी बीच मुख्यमंत्री के लौटने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
लेकिन ऐसा महसूस होता है कि इस दिन केवल एक कार्यक्रम समाप्त नहीं हुआ।
धरती में केवल पौधे ही नहीं लगाए गए थे।
एक विचार भी बोया गया था।
एक विश्वास भी जन्म ले चुका था।
एक ऐसा विश्वास कि भारत का प्राचीन आयुर्वेद, आधुनिक विज्ञान और पारिस्थितिकी मिलकर विश्व को स्वास्थ्य, सद्भाव और सतत विकास की नई दिशा दे सकते हैं।
शायद यही कारण है कि ‘श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड हिमालय’ केवल उत्तराखंड का एक नया आकर्षण नहीं, बल्कि भारत की उस उभरती हुई पहचान का प्रतीक बन रहा है, जो अपनी प्राचीन विरासत, प्राकृतिक संपदा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बल पर दुनिया को स्वास्थ्य, हरियाली और संतुलित विकास का संदेश देना चाहती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड हिमालय कहां स्थित है?
यह उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के माला गांव में विकसित किया गया है।
हर्बल वर्ल्ड हिमालय की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
यह एक जीवंत हर्बल गार्डन है, जहां विश्व के दुर्लभ औषधीय पौधों, उपचार परंपराओं और अनुसंधान को एकीकृत किया गया है।
परियोजना का आकार कितना है?
यह परियोजना 200 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है।
इस परियोजना में कितनी चिकित्सा प्रणालियों को शामिल किया गया है?
इसमें 9 प्रमुख वनस्पति-आधारित चिकित्सा प्रणालियों तथा लगभग 964 चिकित्सा विज्ञानों की अवधारणा को शामिल किया गया है।
यह परियोजना उत्तराखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह परियोजना उत्तराखंड को जड़ी-बूटियों, जैव विविधता, हर्बल पर्यटन, आयुर्वेद, अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह राज्य को ज्ञान, अनुसंधान और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त करती है।








