पूर्व आंध्र विधानसभा स्पीकर थम्मिनेनी सीताराम के परिवार पर भूमि फर्जीवाड़े के आरोप, पुलिस ने शुरू की गहन जांच दिल्ली के GTB अस्पताल में मरीज पर गिरा सीलिंग फैन, कुछ घंटों बाद हुई मौत; अस्पताल ने बताया अलग कारण सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च के बाद ही लेंगे फैसला खराब मौसम के चलते अमरनाथ और माता वैष्णो देवी यात्रा पर अस्थायी रोक, श्रद्धालुओं से यात्रा टालने की अपील बच्चों की शिक्षा का बढ़ता खर्च: अब सिर्फ स्कूल फीस नहीं, पूरी पढ़ाई बन गई परिवारों की सबसे बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी सोनम वांगचुक की पत्नी ने हाईकोर्ट से लगाई गुहार, अस्पताल में भर्ती को बताया ‘अवैध हिरासत’

सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च के बाद ही लेंगे फैसला

शिक्षा व्यवस्था में सुधार और NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर 20 दिनों से अधिक समय से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए तीन स्पष्ट शर्तें रखी हैं। उन्होंने कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।

सफदरजंग अस्पताल से जारी एक हस्तलिखित संदेश में वांगचुक ने दावा किया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल में रखा गया है। उन्होंने लिखा कि संसद मार्च (Sansad Chalo March) के बाद ही वह अपना अंतिम निर्णय लेंगे और केवल निर्धारित परिस्थितियों में ही अपना अनशन समाप्त करेंगे।

भूख हड़ताल खत्म करने के लिए रखीं तीन शर्तें

सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।

1. शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं की जिम्मेदारी तय हो

उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा प्रणाली में हुई गंभीर कमियों, विशेष रूप से NEET प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उनका कहना है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े ऐसे मामलों में केवल जांच नहीं, बल्कि जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

2. संसद में उठे पेपर लीक का मुद्दा

उनकी दूसरी शर्त है कि देश के प्रमुख राजनीतिक दल और सांसद यह सार्वजनिक आश्वासन दें कि NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार का मुद्दा संसद में प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा।

3. शीर्ष नेता अस्पताल आकर दें भरोसा

वांगचुक ने तीसरी मांग रखते हुए कहा कि यदि उनकी स्वास्थ्य स्थिति उन्हें संसद मार्च में शामिल होने की अनुमति नहीं देती, तो देश के वरिष्ठ राजनीतिक नेता स्वयं अस्पताल आकर उन्हें पहली दो मांगों पर लिखित या सार्वजनिक आश्वासन दें।

अस्पताल से लगाया “अवैध हिरासत” का आरोप

अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि उनकी आवाज, आवाजाही और संचार की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है। उन्होंने इसे “अवैध हिरासत” बताते हुए कहा कि वह अपनी लोकतांत्रिक मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठा रहे हैं।

हालांकि, प्रशासन की ओर से इस आरोप पर अलग दृष्टिकोण सामने आया है। अधिकारियों का कहना है कि उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें चिकित्सा निगरानी में रखा गया है।

क्यों शुरू की थी भूख हड़ताल?

सोनम वांगचुक लंबे समय से शिक्षा सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाते रहे हैं। हाल ही में वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी।

समय के साथ उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी, जिसके बाद डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर बताया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?

वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी थी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और उनकी सहमति से उपचार किया जा रहा है। इसलिए फिलहाल ऐसा नहीं कहा जा सकता कि उनकी स्वायत्तता का उल्लंघन हो रहा है।

हालांकि, परिवार की ओर से इस आदेश को बड़ी पीठ के समक्ष चुनौती देने की तैयारी की जा रही है।

स्वास्थ्य पर बनी हुई है चिंता

डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक केवल सीमित पोषण पर रहने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हुई है। चिकित्सा टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

इसी बीच, शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। कई छात्र संगठन और सामाजिक समूह भी परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की मांग कर रहे हैं।

Leave a Comment

और पढ़ें

🔮 आज का राशिफल