प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए विपक्षी नेताओं पर निशाना साधा। युवाओं और Gen-Z को संबोधित अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने अपने हालिया ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान का जिक्र किया और कहा कि इस शब्द के सामने आने के बाद कई लोगों की प्रतिक्रियाओं से उनके ‘असली रंग’ जनता के सामने आ गए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने लाल किले से दिए गए भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने इसे होम्योपैथिक दवा से जोड़ते हुए कहा कि होम्योपैथी के सिद्धांत के अनुसार उपचार शुरू होने पर बीमारी के लक्षण शुरुआती दौर में और अधिक दिखाई दे सकते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि इसी तरह ‘दिमागी नक्सल’ वाली ‘होम्योपैथिक गोली’ का जिक्र करने के बाद ऐसे लोग एक-एक करके सामने आने लगे और अब जनता भी उन लोगों के कथित रुख को देख रही है, जो इस तरह की विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं।
युवाओं से विकसित भारत का सपना देखने की अपील
अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं से देश के भविष्य को लेकर महत्वाकांक्षी सोच रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के लिए नई पीढ़ी को अतीत के अनुभवों से सीखने और भविष्य के लिए स्पष्ट दृष्टि तैयार करने की जरूरत है।
पीएम मोदी ने कहा कि कुछ लोग यह सोच सकते हैं कि 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश में सरकार ने जो काम किए, वे आसानी से किए जा सकते थे। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वास्तव में परिस्थितियां इतनी आसान थीं।
प्रधानमंत्री ने छात्रों को देश के पुराने दौर की घटनाओं की याद दिलाते हुए कहा कि उन्हें यह समझना चाहिए कि अलग-अलग समय में देश के सामने किस तरह की चुनौतियां आईं और सरकारों ने उनका सामना किस प्रकार किया।
केदारनाथ त्रासदी का भी किया जिक्र
पीएम मोदी ने 2013 की केदारनाथ त्रासदी का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय प्राकृतिक आपदा के बाद पूरा सरकारी तंत्र हिल गया था। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन सरकार के सामने संकट से निपटने और प्रतिक्रिया देने को लेकर गंभीर चुनौतियां थीं।
उन्होंने छात्रों से कहा कि देश के इतिहास और पिछली चुनौतियों को समझना इसलिए जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी भविष्य के भारत के लिए बेहतर फैसले लेने और नई दिशा तय करने में सक्षम हो सके।
2008 के वैश्विक आर्थिक संकट पर कांग्रेस सरकार को घेरा
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट का भी जिक्र किया। उन्होंने तत्कालीन सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उस समय बैंकिंग व्यवस्था गंभीर दबाव में आ गई थी।
पीएम मोदी ने कहा कि उस दौर की सरकार ने संकट से प्रभावी तरीके से निपटने के बजाय लंबे समय तक उसे छिपाने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि उस समय देश की बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा था।
SRCC के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री का भाषण मुख्य रूप से युवाओं, आर्थिक विकास, देश की उपलब्धियों और विकसित भारत के लक्ष्य पर केंद्रित रहा। हालांकि, अपने संबोधन के दौरान उन्होंने राजनीतिक मुद्दों को भी उठाया और विपक्ष पर तीखे तंज किए।








