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आठ माह के मासूम के अपहरण में दो महिलाओं को 10-10 साल की सजा, पांच आरोपी बरी

हरिद्वार। आठ माह के मासूम बच्चे के अपहरण और मानव तस्करी के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दो महिलाओं को दोषी करार दिया है। चतुर्थ अपर जिला जज आरके श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी आशा और रूबी को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर आठ-आठ हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया है।

शासकीय अधिवक्ता अनुज कुमार सैनी के अनुसार, 10 दिसंबर 2022 को ज्वालापुर क्षेत्र में शिकायतकर्ता रविन्द्र का सात माह का पुत्र घर से संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गया था। रविन्द्र की पत्नी ने पुलिस को बताया था कि वह कपड़े सुखाने के लिए छत पर गई थी और जब वापस लौटी तो खाट पर सो रहा बच्चा नहीं मिला। इसके बाद ज्वालापुर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

घटना के अगले दिन पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर भारत माता मंदिर, सप्तऋषि क्षेत्र से दो महिलाओं—रूबी और आशा—को गिरफ्तार किया। उनके पास से अपहृत बच्चा सकुशल बरामद किया गया। मौके पर मौजूद शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी ने बच्चे की पहचान कर ली, जिससे पुलिस को मामले में महत्वपूर्ण सफलता मिली।

पुलिस विवेचना में सामने आया कि आरोपी रूबी और आशा ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर बच्चे का अपहरण किया और उसे संजय शर्मा व उसकी पत्नी पायल को बेच दिया था। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने कुल सात आरोपियों—आशा, रूबी, पायल, संजय शर्मा, सुषमा, किरण और अनीता—के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आशा और रूबी को दोषी मानते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 370/34 के तहत 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 363/34 के तहत तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और तीन-तीन हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

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