नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द, पेपर लीक विवाद के बाद छात्रों में नाराज़गी बढ़ी

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET UG 2026 को रद्द किए जाने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद यह बड़ा फैसला लिया। अब परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, जिसकी नई तारीखें बाद में घोषित की जाएंगी।

एनटीए के फैसले के बाद कई राज्यों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के बाहर छात्र संगठनों ने प्रदर्शन करते हुए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग की। छात्रों का कहना है कि लाखों उम्मीदवारों की मेहनत और मानसिक स्थिति पर इस फैसले का गंभीर असर पड़ा है।

बताया जा रहा है कि परीक्षा से एक रात पहले प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका को लेकर जांच एजेंसियों को कुछ अहम इनपुट मिले थे। इसके बाद केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों ने मामले की समीक्षा की। जांच में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए जिनके आधार पर परीक्षा को जारी रखना उचित नहीं माना गया। इसके बाद एनटीए ने आधिकारिक रूप से परीक्षा रद्द करने की घोषणा कर दी।

एनटीए ने अपने बयान में कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। साथ ही पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई है।

मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हर साल लाखों छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने से छात्रों के भविष्य और शैक्षणिक कैलेंडर पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। कई छात्रों ने कहा कि उन्होंने महीनों तक कठिन तैयारी की थी और अब दोबारा परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए मानसिक दबाव बढ़ाने वाला होगा।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद यदि प्रश्नपत्र सुरक्षित नहीं रह पा रहे हैं, तो परीक्षा संचालन प्रणाली में बड़े सुधार की जरूरत है।

कई अभिभावकों ने भी सरकार से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। उनका कहना है कि छात्रों का भरोसा बनाए रखने के लिए केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना जरूरी है।

राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं ने परीक्षा प्रबंधन में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं सरकार का कहना है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए त्वरित निर्णय लिया गया है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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