सोशल मीडिया फ्रेंडशिप से जासूसी तक: जम्मू का युवक गिरफ्तार, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है जिसने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए चल रहे कथित जासूसी नेटवर्क को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जम्मू क्षेत्र के मकवाल गांव के रहने वाले 23 वर्षीय युवक को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार युवक सोशल मीडिया पर एक महिला के संपर्क में आया था, जिसने खुद को सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ की जवान बताया था।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, युवक की पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी और वह पिछले कुछ महीनों से स्नैपचैट पर सक्रिय था। इसी दौरान उसकी बातचीत एक महिला से शुरू हुई। महिला ने दावा किया कि वह पंजाब में तैनात बीएसएफ कर्मी है। धीरे-धीरे दोनों के बीच लगातार चैटिंग और वीडियो कॉल होने लगी। जांच में सामने आया है कि महिला ने युवक का भरोसा जीतने के बाद उससे निजी जानकारी और मोबाइल से जुड़ी डिटेल्स मांगनी शुरू कर दीं।

बताया जा रहा है कि महिला ने बाद में यह कहकर एक व्हाट्सएप ओटीपी मांगा कि उसकी नई पोस्टिंग राजौरी के सुंदरबनी सेक्टर में हो गई है और वहां नेटवर्क की समस्या रहती है। युवक ने बिना शक किए अपनी मां के मोबाइल नंबर पर आया ओटीपी साझा कर दिया। इसके बाद कथित तौर पर महिला को उस अकाउंट तक पहुंच मिल गई।

जांच एजेंसियों का दावा है कि इसके बाद युवक से जम्मू क्षेत्र के सैन्य बंकरों, फ्लाईओवर और रक्षा प्रतिष्ठानों की तस्वीरें और वीडियो मांगे गए। शुरुआती तस्वीरें भेजने के बदले युवक के बैंक खाते में कुछ पैसे भी भेजे गए। सूत्रों के अनुसार पहली बार उसे करीब दो हजार रुपये मिले थे। इसके बाद उससे और जानकारी मांगी जाने लगी।

सैन्य खुफिया एजेंसियों को युवक की गतिविधियों पर संदेह हुआ तो उस पर नजर रखी जाने लगी। निगरानी के दौरान जब यह पुष्टि हुई कि संवेदनशील तस्वीरें साझा की जा रही हैं, तब सेना ने जम्मू पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद संयुक्त कार्रवाई में युवक को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा रही है। पूछताछ में युवक ने कथित तौर पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करने की बात स्वीकार की है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। हाल के महीनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें सोशल मीडिया के जरिए लोगों को फंसाकर सेना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म जासूसी और साइबर अपराध के नए माध्यम बनते जा रहे हैं।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ निजी जानकारी, ओटीपी या संवेदनशील फोटो साझा नहीं करनी चाहिए। साथ ही संदिग्ध सोशल मीडिया प्रोफाइल की तुरंत सूचना पुलिस या साइबर सेल को देनी चाहिए।

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