दिल्ली दौरे पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय, कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात टली, राजनीतिक चर्चाएं तेज

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के दिल्ली दौरे को लेकर राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा बनी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ प्रस्तावित बैठक टल गई है। सूत्रों के अनुसार यह मुलाकात अगले सप्ताह होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय का यह पहला आधिकारिक दिल्ली दौरा है। हाल ही में विधानसभा में विश्वास मत जीतने के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई है। उनकी पार्टी टीवीके ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बाद कांग्रेस, वाम दलों और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनाई थी। दशकों बाद राज्य में गठबंधन सरकार बनने से राष्ट्रीय राजनीति में भी नए समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है।

दिल्ली पहुंचने के बाद विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और तमिलनाडु से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए। उन्होंने कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु परियोजना को लेकर चिंता जाहिर की। विजय ने कहा कि इस परियोजना से तमिलनाडु के किसानों पर असर पड़ सकता है और राज्य में इसे लेकर चिंता का माहौल है।

मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु के मछुआरों की गिरफ्तारी का मुद्दा भी प्रधानमंत्री के सामने उठाया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कई मछुआरों को श्रीलंका के अधिकारियों ने हिरासत में लिया है और बड़ी संख्या में नौकाएं भी जब्त की गई हैं। विजय ने इस विषय पर केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की।

इसके अलावा तमिल थाई वाझ्थु गीत को लेकर हुए विवाद पर भी चर्चा हुई। विजय ने कहा कि तमिलनाडु हमेशा राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में तमिल सांस्कृतिक परंपराओं का विशेष महत्व है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान विजय ने तमिलनाडु के विकास से जुड़े कई प्रस्ताव सौंपे। उन्होंने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे परियोजनाओं, औद्योगिक गलियारों और बंदरगाहों के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग की। साथ ही उन्होंने कोयंबटूर, मदुरै और इरोड जैसे शहरों में मेट्रो रेल परियोजनाओं को गति देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। एक तरफ उन्होंने केंद्र सरकार के साथ संवाद बनाए रखा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेतृत्व के साथ प्रस्तावित मुलाकात भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हालांकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ बैठक के अचानक टलने के पीछे की वजह साफ नहीं हो पाई है, लेकिन माना जा रहा है कि दोनों पक्ष जल्द नई तारीख तय कर सकते हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह मुलाकात दक्षिण भारत की राजनीति और विपक्षी रणनीति के लिहाज से अहम साबित हो सकती है।

तमिलनाडु में विजय की सरकार बनने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में भी नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। अभिनेता से नेता बने विजय अब खुद को केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रखना चाहते। दिल्ली दौरे के जरिए उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की है कि तमिलनाडु के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना उनकी प्राथमिकता होगी।

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