सुबह के पांच बजने वाले थे। हरिद्वार में गंगा की धारा अपने स्वाभाविक वेग से बह रही थी। घाटों पर कुछ साधक ध्यान में लीन थे और कुछ लोग अपनी दिनचर्या की शुरुआत कर रहे थे। इसी बीच मेरी नजर कंप्यूटर स्क्रीन पर थी, जहां आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 का सीधा प्रसारण शुरू हो चुका था।
गंगा और कृष्णा नदी के बीच हजारों किलोमीटर की दूरी है, लेकिन उस सुबह ऐसा महसूस हो रहा था जैसे पूरा भारत एक ही चेतना, एक ही लय और एक ही श्वास से जुड़ गया हो। जैसे-जैसे कैमरे की नजरें विशाल आयोजन स्थल पर घूम रही थीं, वहां उमड़ा जनसैलाब दिखाई दे रहा था। सुबह छह बजे से पहले ही पूरा परिसर योग साधकों से भर चुका था।
योग केवल एक कार्यक्रम नहीं रह गया था, बल्कि वह एक ऐसी सामूहिक अनुभूति बन चुका था, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे लाखों लोग एक साथ सहभागी बन रहे थे। हरिद्वार में गंगा तट और विजयवाड़ा में कृष्णा नदी का क्षेत्र उस सुबह मानो एक ही आध्यात्मिक सूत्र में बंध गया था।
विजयवाड़ा योग शिविर: जब स्वामी रामदेव के कठिन आसन देख थम गई नजरें

लाइव प्रसारण देखते हुए एक बात बार-बार ध्यान खींच रही थी। मंच पर योग गुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण जिस सहजता से कठिन से कठिन योग मुद्राओं का प्रदर्शन कर रहे थे, वह किसी भी दर्शक को आश्चर्यचकित कर सकता था।
प्रमुख आसनों में उष्ट्रासन, पूर्ण चक्रासन, शीर्षासन, मयूरासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन और पश्चिमोत्तानासन का प्रदर्शन किया गया। हर आसन में शरीर का संतुलन, मन की स्थिरता और वर्षों की साधना की गहराई स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहां लोग कुछ सीढ़ियां चढ़ने में भी थकान महसूस करने लगते हैं, वहां बढ़ती उम्र में भी इस स्तर की ऊर्जा, लचीलापन और नियंत्रण योग की वास्तविक शक्ति को सामने लाता है। यह दृश्य केवल योगाभ्यास नहीं था, बल्कि अनुशासन, साधना और आत्मनियंत्रण का जीवंत उदाहरण था।
योग दिवस 2026 की थीम: “Yoga for Healthy Ageing” (स्वस्थ आयु के लिए योग)

12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कृष्णा नदी क्षेत्र स्थित अमरावती (विजयवाड़ा) से स्वामी रामदेव ने पूरी दुनिया को एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली संदेश दिया—
“करो योग, रहो निरोग”
यह केवल एक नारा नहीं था, बल्कि पूरे कार्यक्रम की आत्मा थी।
इस वर्ष की थीम रही—
“Yoga for Healthy Ageing” अर्थात स्वस्थ आयु के लिए योग
आज जब पूरी दुनिया जीवनशैली संबंधी बीमारियों (Lifestyle Diseases), मानसिक तनाव, अवसाद और असंतुलित दिनचर्या जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब यह विषय पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक दिखाई देता है।
स्वामी रामदेव के अनुसार—
- योगियों के लिए योग एक गहन साधना है।
- सामान्य व्यक्ति के लिए यह एक स्वस्थ जीवन शैली है।
- रोगियों के लिए यह प्राकृतिक चिकित्सा (Natural Healing) का आधार है।
यही कारण है कि आज योग की स्वीकार्यता भारत की सीमाओं से निकलकर दुनिया के लगभग 200 देशों तक पहुंच चुकी है।
सामूहिक प्राणायाम और ‘योगर्षियोगनिघण्टु:’ पुस्तक का विमोचन

योग सत्र का सबसे प्रभावशाली हिस्सा सामूहिक प्राणायाम रहा। स्क्रीन पर हजारों लोगों को एक साथ कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका और भ्रामरी करते देखना अपने आप में एक अद्भुत अनुभव था।
स्वामी रामदेव ने प्राणायाम को “ब्रह्मविद्या” बताते हुए कहा कि यह शरीर के सूक्ष्मतम स्तर पर कार्य करता है। उनके अनुसार सही श्वास ही सही स्वास्थ्य की पहली शर्त है।
जब हजारों लोग एक साथ नियंत्रित श्वास के साथ प्राणायाम कर रहे थे, तब वह दृश्य केवल एक योग सत्र नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का एक विराट स्वरूप प्रतीत हो रहा था।
योग का चलता-फिरता विश्वकोश: “योगर्षियोगनिघण्टु:”
इस भव्य अवसर पर आचार्य बालकृष्ण द्वारा रचित ऐतिहासिक पुस्तक ‘योगर्षियोगनिघण्टु:’ का भी विमोचन किया गया।
योग के क्षेत्र में यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें हजारों योगासन, प्राणायाम, ध्यान विधियां, बंध, मुद्राएं और शोधन क्रियाओं का व्यवस्थित एवं व्यापक संकलन किया गया है।
योग के शोधार्थियों, प्रशिक्षकों और साधकों के लिए यह पुस्तक आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में स्थापित हो सकती है।
सीएम चंद्रबाबू नायडू का विजन: तकनीक और अध्यात्म का संगम

कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू का संबोधन भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।
उन्होंने योग को राज्यव्यापी जनआंदोलन बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि भविष्य का विकास केवल तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से भी निर्धारित होगा।
उनका यह दृष्टिकोण आधुनिक विकास और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास प्रतीत हुआ।
कार्यक्रम के दौरान पतंजलि गुरुकुलम्, आचार्यकुलम् और पतंजलि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने मलखंभ योग और रज्जु योग का आकर्षक प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों ने अनुशासन, समर्पण और शारीरिक दक्षता की एक नई मिसाल पेश की।
निष्कर्ष: मेरी नजर में इस आयोजन का सबसे बड़ा संदेश
हरिद्वार में गंगा किनारे बैठकर विजयवाड़ा के इस कार्यक्रम को देखते हुए मेरे मन में बार-बार एक ही विचार आया—योग की सबसे बड़ी शक्ति उसकी सादगी है।
इसके लिए न तो किसी महंगे उपकरण की आवश्यकता है और न ही उम्र की कोई सीमा है। बस एक संकल्प, कुछ मिनटों का समय और स्वयं के प्रति जागरूकता चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के कारण आज 21 जून को पूरी दुनिया योग के माध्यम से एक सूत्र में बंधती है। विजयवाड़ा से उठी यह आवाज पूरी दुनिया को यह याद दिलाने का प्रयास थी कि आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और प्रतिस्पर्धा के बीच भी आत्मिक शांति संभव है।
गंगा तट से कृष्णा तट तक फैली इस योग चेतना ने यह संदेश दिया कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और सार्थक बनाने का एक संपूर्ण विज्ञान है। और शायद यही अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 का सबसे बड़ा संदेश भी था।








