विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय का बड़ा बयान, बोले- “NEET असमानता बढ़ाता है, तमिलनाडु की दो-भाषा नीति जारी रहेगी”

तमिलनाडु विधानसभा के सत्र के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने शिक्षा, भाषा नीति और राज्य की राजनीति से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की आलोचना करते हुए कहा कि यह परीक्षा सामाजिक और शैक्षणिक असमानता को बढ़ावा देती है और इसके स्थान पर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जो सभी विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लंबे समय से इस बात की वकालत कर रही है कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए छात्रों के स्कूल स्तर के प्रदर्शन और अन्य उपयुक्त मानकों को अधिक महत्व दिया जाए। उनका मानना है कि एकल प्रवेश परीक्षा कई छात्रों के लिए अतिरिक्त दबाव और चुनौतियां पैदा करती है, खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के लिए।

विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान विजय ने भाषा नीति पर भी स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की दो-भाषा नीति आगे भी जारी रहेगी, जिसमें तमिल और अंग्रेजी को प्राथमिकता दी जाती है। उनके अनुसार यह नीति राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में भी मदद करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसी भी प्रकार के भाषाई दबाव के पक्ष में नहीं है और शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को अपनी भाषा और पसंद के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि तमिल भाषा राज्य की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसका संरक्षण तथा विकास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

अपने भाषण में विजय ने राजनीतिक आलोचनाओं का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने जनता के विश्वास और समर्थन के बल पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा आसान नहीं रही, लेकिन जनता के सहयोग और विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने की शक्ति दी है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य केवल किसी एक वर्ग या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के प्रत्येक परिवार के कल्याण के लिए काम करना है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक विकास को अपनी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया।

इसके अलावा उन्होंने हाल के कुछ दुखद घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि सरकार हर परिस्थिति में नागरिकों के साथ खड़ी है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं और नीतियों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

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