देश के 11 राज्यों के विद्यार्थियों ने पतंजलि में आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा समग्र व्यक्तित्व विकास का अद्वितीय अनुभव किया महसूस
-पतंजलि विश्वविद्यालय के एक महीना चले ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम-2026 का भव्य एवं प्रेरणादायी का हुआ समापन
-मैं चाहता हूं, यहां से जाने वाला प्रत्येक विद्यार्थी केवल डिग्रीधारक नहीं, चरित्रवान और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित युवा बने: आचार्य बालकृष्ण
-पतंजलि केवल विषयगत नहीं, नैतिक शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास का बड़ा केंद्र- डॉ. धन सिंह रावत
हरिद्वार: पतंजलि विश्वविद्यालय एवं पतंजलि अनुसंधान संस्थान हरिद्वार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक माह के ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम-2026 का आज भव्य एवं गरिमामय समापन समारोह सम्पन्न हुआ। देश के 11 राज्यों से आए 130 छात्र-छात्राओं ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेकर आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा समग्र व्यक्तित्व विकास का अद्वितीय अनुभव प्राप्त किया। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को प्रयोगशाला आधारित वैज्ञानिक प्रशिक्षण के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, योग, यज्ञ एवं नैतिक मूल्यों से भी जोड़ने का कार्य किया।
समापन समारोह में पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण तथा उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा और आधुनिक विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला में शोध करने वाला विद्यार्थी यदि भारतीय संस्कृति, योग एवं यज्ञ की परंपरा से भी जुड़ा हो, तो उसका व्यक्तित्व अधिक संतुलित, अनुशासित एवं राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित बनता है। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे चाहते हैं कि यहां से जाने वाला प्रत्येक विद्यार्थी केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि चरित्रवान, शोधपरक और राष्ट्रनिर्माण के लिए समर्पित युवा बने।
मुख्य अतिथि डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना को साकार करता है, जहाँ विद्यार्थियों को केवल विषयगत ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल, अनुसंधान क्षमता, भारतीय ज्ञान प्रणाली तथा नैतिक संस्कारों का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने संस्थानों में लौटकर यहाँ प्राप्त अनुभवों को साझा करें तथा विज्ञान एवं समाज के मध्य सेतु बनने का कार्य करें। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिया गया। समापन समारोह में विश्वविद्यालय एवं अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक, प्राध्यापक, शोधकर्ता, प्रशिक्षण समन्वयक, अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। समारोह का समापन सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य, राष्ट्र की वैज्ञानिक प्रगति तथा मानव कल्याण की मंगलकामना के साथ सम्पन्न हुआ।
महीने भर चला प्रशिक्षण कार्यक्रम
एक माह तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि प्रत्येक दिन का शुभारंभ वैदिक यज्ञ एवं योगाभ्यास से हुआ। इसके पश्चात विभिन्न प्रयोगशालाओं में आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों एवं अनुसंधान तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। सूक्ष्मजीव विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, जैव सूचना विज्ञान, औषधीय पादप, आणविक जीवविज्ञान तथा अन्य वैज्ञानिक विषयों पर विशेषज्ञ वैज्ञानिकों द्वारा व्याख्यान एवं प्रयोगात्मक सत्र आयोजित किए गए।
————————————————- प्रतिभागियों का कैसा रहा अनुभव
प्रतिभागियों ने बताया कि यह प्रशिक्षण केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे उन्हें वैज्ञानिक सोच के साथ अनुशासित एवं संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी मिली। उनका कहना था कि विज्ञान, योग, यज्ञ एवं नैतिक मूल्यों का ऐसा समन्वित प्रशिक्षण देश में विरल है और यह अनुभव उनके शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन में सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
—————————————- पांच उत्कृष्ट प्रतिभागियों को मिला सम्मान
समापन समारोह का सर्वाधिक आकर्षक एवं भावनात्मक क्षण वह रहा जब प्रशिक्षण अवधि के दौरान शैक्षणिक उपलब्धियों, प्रयोगशाला कार्य, अनुशासन, योग एवं यज्ञ में सहभागिता तथा समग्र व्यक्तित्व विकास के आधार पर चयनित पांच उत्कृष्ट प्रतिभागियों को हवन-किट भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारतीय संस्कृति एवं वैज्ञानिक उत्कृष्टता के समन्वय का प्रतीक रहा। पांच उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इनमें चंद्रिका गोयल , शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश), मेघना गुप्ता, शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश), बादल पंचाल, आईटीएम विश्वविद्यालय, भोपाल (मध्य प्रदेश), अर्वीतिका त्यागी, एसडी कॉलेज ऑफ फार्मेसी, उत्तर प्रदेश, अनन्या उनियाल, ग्राफिक एरा (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), उत्तराखंड। सभी विजेताओं को आचार्य बालकृष्ण जी महाराज एवं डॉ. धन सिंह रावत ने स्मृति-चिह्न स्वरूप हवन-किट प्रदान कर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
——————-