अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में चुनावी प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए भारत की चुनाव व्यवस्था का उदाहरण दिया है। ट्रंप ने भारत में मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए इस्तेमाल होने वाली फोटो आईडी व्यवस्था का हवाला देते हुए SAVE America Act को पारित करने की अपील की है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य अमेरिकी चुनावों में मतदाता पंजीकरण और मतदान के लिए नागरिकता तथा पहचान से जुड़े नियमों को और सख्त करना है।
ट्रंप ने 17 अगस्त 2026 को अपने Truth Social अकाउंट पर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से सवाल किया था कि अमेरिका में वैध फोटो पहचान पत्र के बिना चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं।
ट्रंप ने भारत के लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए दावा किया कि भारत के पिछले आम चुनाव में करीब 64.6 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया और एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने डाक मतपत्र के जरिए वोट डाला। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में प्रत्येक मतदाता के पास वैध फोटो पहचान दस्तावेज होना जरूरी था।
ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि अमेरिका को भी ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं की पहचान और पात्रता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कांग्रेस से SAVE America Act को जल्द पारित करने की मांग की।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी किया समर्थन
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी ट्रंप के बयान का समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि भारत के चुनाव में बड़ी संख्या में मतदाताओं के लिए पहचान सुनिश्चित करने की व्यवस्था एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
गोर ने भारत के 2024 के आम चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि करीब 64.6 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया और मतदाताओं की पहचान के लिए ID की आवश्यकता थी। उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस से SAVE America Act पारित करने की अपील की।
क्या है SAVE America Act?
SAVE America Act का पूरा नाम Safeguard American Voter Eligibility Act है। यह प्रस्तावित कानून अमेरिकी संघीय चुनावों में मतदाता पंजीकरण के दौरान नागरिकता और पहचान का प्रमाण अनिवार्य करने की दिशा में है।
प्रस्ताव के तहत मतदाताओं को पंजीकरण के समय वैध पहचान पत्र और अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण उपलब्ध कराना पड़ सकता है। इसके अलावा, कानून में मतदाता सूची से गैर-अमेरिकी नागरिकों के नाम हटाने के लिए राज्यों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालने का भी प्रस्ताव है।
कानून में डाक से मतदान यानी mail-in voting पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। प्रस्ताव के अनुसार बीमारी, दिव्यांगता, सैन्य सेवा या यात्रा जैसी कुछ विशेष परिस्थितियों में ही डाक से मतदान की अनुमति दिए जाने की बात कही गई है।
कानून को लेकर अमेरिका में मतभेद
SAVE America Act को लेकर अमेरिका में राजनीतिक मतभेद भी हैं। रिपब्लिकन पार्टी इसे चुनाव की विश्वसनीयता और मतदाता पात्रता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम बताती है, जबकि डेमोक्रेट्स और आलोचक आशंका जताते हैं कि कड़े पहचान और नागरिकता संबंधी नियम कुछ पात्र मतदाताओं के लिए मतदान को मुश्किल बना सकते हैं।
ट्रंप लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि अमेरिकी चुनावों में केवल पात्र नागरिकों को ही मतदान का अधिकार होना चाहिए। व्हाइट हाउस भी इस प्रस्ताव को इसी उद्देश्य से जोड़ता है और इसे ऐसी व्यवस्था के रूप में पेश करता है, जिसमें केवल अमेरिकी नागरिक संघीय चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करें।
भारत का उदाहरण देकर ट्रंप ने अमेरिकी चुनाव व्यवस्था में मतदाता पहचान और पात्रता के मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, भारत और अमेरिका की चुनाव प्रणालियां, मतदान प्रक्रिया और कानूनी ढांचे अलग-अलग हैं, इसलिए दोनों देशों की व्यवस्थाओं की तुलना करते समय इन अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।








