शिमला: हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध श्रीखंड महादेव यात्रा 2026 पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। प्रशासन ने फिलहाल यात्रा को शुरू करने पर रोक लगा दी है। इसकी मुख्य वजह विशेषज्ञों द्वारा यात्रा मार्ग को अत्यधिक जोखिमपूर्ण बताया जाना है। लगातार भूस्खलन, चट्टानों के गिरने, फ्लैश फ्लड और खराब मौसम के कारण श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।
क्यों रोकी गई यात्रा?
विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, भीमद्वारी से पार्वती बाग तक का ट्रैक फिलहाल सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। इस क्षेत्र में कई स्थानों पर रास्ता क्षतिग्रस्त हो चुका है, जबकि भारी बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा लगातार बना हुआ है। ऐसे हालात में हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल माना जा रहा है।
प्रशासन करेगा अंतिम फैसला
जिला प्रशासन और श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट विशेषज्ञों की रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं। यदि मौसम में सुधार होता है और मार्ग को सुरक्षित घोषित किया जाता है, तभी यात्रा शुरू करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल श्रद्धालुओं से बिना आधिकारिक अनुमति यात्रा पर न निकलने की अपील की गई है।
क्यों खास है श्रीखंड महादेव यात्रा?
श्रीखंड महादेव यात्रा को भारत की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में गिना जाता है। समुद्र तल से लगभग 17,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 32–35 किलोमीटर का कठिन पैदल ट्रैक तय करना पड़ता है। यह यात्रा सामान्यतः जुलाई में सीमित दिनों के लिए आयोजित की जाती है और मौसम पर पूरी तरह निर्भर रहती है।
सुरक्षा पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
पिछले वर्षों में इस यात्रा के दौरान खराब मौसम, ऑक्सीजन की कमी और दुर्घटनाओं के कारण कई श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। 2025 में भी एक श्रद्धालु की मौत के बाद सरकार ने जांच के आदेश दिए थे। इसी वजह से इस बार प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है।
(डिस्क्लेमर: यात्रा स्थगित या शुरू करने को लेकर अंतिम निर्णय हिमाचल प्रदेश प्रशासन और श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट द्वारा आधिकारिक घोषणा के बाद ही माना जाएगा। श्रद्धालु केवल आधिकारिक सूचना के आधार पर ही यात्रा की योजना बनाएं।)








