दिल्ली की नई ईवी नीति लागू: पेट्रोल-डीजल दोपहिया और तिपहिया वाहनों को चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा बंद, इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा बढ़ावा राम मंदिर दान मामले पर असदुद्दीन ओवैसी का सरकार पर निशाना, कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल गंगा एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा: सुप्रीम कोर्ट के वकील ने दिखाई इंसानियत, दुर्घटनाग्रस्त कार में फंसे चार लोगों की बचाई जान महर्षि सुश्रुत का वैश्विक गौरव: एडिनबर्ग और मेलबर्न में सम्मान, हरिद्वार के पतंजलि ने दो दशक पहले की थी पहल देश के 11 राज्यों के विद्यार्थियों ने पतंजलि में आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, भारतीय ज्ञान परंपरा और समग्र व्यक्तित्व विकास का अद्वितीय अनुभव किया CBSE बोर्ड परीक्षा 2026: मूल्यांकन को लेकर छात्रों में बढ़ी चिंता, उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच की मांग तेज

दिल्ली की नई ईवी नीति लागू: पेट्रोल-डीजल दोपहिया और तिपहिया वाहनों को चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा बंद, इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा बढ़ावा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने नई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति की घोषणा की है। इस नीति के तहत आने वाले वर्षों में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले नए दोपहिया, तिपहिया और कुछ हल्के व्यावसायिक वाहनों के पंजीकरण को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी तेज़ी मिलेगी।

नई नीति के अनुसार, अप्रैल 2028 से राजधानी में नए पेट्रोल और डीजल दोपहिया वाहनों का पंजीकरण बंद कर दिया जाएगा। वहीं, जनवरी 2027 से नए पेट्रोल और डीजल तिपहिया वाहनों तथा हल्के व्यावसायिक वाहनों के पंजीकरण पर भी रोक लागू होगी। हालांकि, पहले से पंजीकृत वाहनों पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह व्यवस्था केवल नए वाहनों के पंजीकरण पर लागू होगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नीति वित्त वर्ष 2030 तक प्रभावी रहेगी और इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली को स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की ओर ले जाना है। इसके लिए बड़े स्तर पर चार्जिंग नेटवर्क विकसित करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार इस नीति के तहत लगभग 15,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस राशि का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने, चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने और आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य पूरे शहर में 32,000 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग पॉइंट स्थापित करना है, जिससे वाहन चालकों को चार्जिंग की सुविधा आसानी से उपलब्ध हो सके।

नई नीति में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने वालों के लिए विशेष प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान किया गया है। पहले वर्ष में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने पर 30,000 रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। दूसरे वर्ष यह सहायता 20,000 रुपये और तीसरे वर्ष 10,000 रुपये होगी।

इसी प्रकार, इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन खरीदने वालों को पहले वर्ष 50,000 रुपये, दूसरे वर्ष 40,000 रुपये और तीसरे वर्ष 30,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा। वहीं हल्के व्यावसायिक इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 1 लाख रुपये तक की सहायता राशि निर्धारित की गई है, जिससे छोटे व्यवसायियों और परिवहन क्षेत्र को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित किया जा सके।

नई ईवी नीति की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि 30 लाख रुपये तक कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को ही पूर्ण रोड टैक्स छूट का लाभ मिलेगा। इससे अधिक कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अलग कर व्यवस्था लागू होगी। वहीं, नीति के अंतिम स्वरूप में हाइब्रिड कारों को रोड टैक्स में विशेष छूट देने का प्रस्ताव शामिल नहीं किया गया है। सरकार का कहना है कि विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीति का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया गया तो दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। इससे ईंधन पर निर्भरता कम होगी, कार्बन उत्सर्जन घटेगा और राजधानी की खराब वायु गुणवत्ता में सुधार आने की संभावना है। साथ ही, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से लोगों का इलेक्ट्रिक वाहनों पर भरोसा भी मजबूत होगा।

कुल मिलाकर, दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह पहल प्रदूषण कम करने, हरित परिवहन को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी।

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