शादी को आमतौर पर जीवन की नई और खुशहाल शुरुआत माना जाता है, लेकिन नोएडा की रहने वाली एक 27 वर्षीय महिला के लिए यह रिश्ता कुछ ही दिनों में गंभीर विवाद और कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया। महिला ने अपने पति पर लगातार घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़िता के अनुसार, उसकी शादी 30 अप्रैल को पूरे रीति-रिवाजों के साथ हुई थी। शादी के बाद उसका पति उसके साथ नोएडा स्थित घर में रहने आया। महिला का दावा है कि विवाह के अगले ही दिन से उसके साथ दुर्व्यवहार शुरू हो गया। उसने आरोप लगाया कि पति छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौज करता था और शारीरिक रूप से भी प्रताड़ित करता था। शुरुआत में उसने रिश्ते को बचाने की कोशिश की और उम्मीद की कि समय के साथ स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
महिला के अनुसार, शादी के चार दिन बाद दोनों हनीमून मनाने के लिए सिक्किम और दार्जिलिंग गए। उसका कहना है कि यात्रा के दौरान भी पति का व्यवहार नहीं बदला। आरोप है कि 9 मई को होटल में दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद पति ने उसे सीढ़ियों से धक्का दे दिया। इस घटना में उसके घुटनों, पीठ और सिर पर गंभीर चोटें आईं। महिला का यह भी आरोप है कि उस दौरान उसे जान से मारने की धमकी दी गई।
पीड़िता का कहना है कि हनीमून से लौटने के बाद भी उसके साथ मारपीट जारी रही। 10 मई को जब उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही तो पति कथित रूप से और अधिक आक्रामक हो गया। महिला के अनुसार, उसका मोबाइल फोन जमीन पर फेंक दिया गया, पेट में लात मारी गई और थप्पड़ तथा मुक्कों से हमला किया गया। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि उसने पुलिस से संपर्क किया तो उसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
कुछ समय बाद आरोपी पति नोएडा छोड़कर अपने माता-पिता के घर दिल्ली चला गया। इसके बाद महिला ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को देते हुए 28 मई को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। दोनों पक्षों के बयान, उपलब्ध सबूत और अन्य आवश्यक जानकारियों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
यह मामला एक बार फिर घरेलू हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा हो तो उसे चुप रहने के बजाय कानूनी सहायता और संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। समय पर की गई शिकायत न केवल पीड़ित की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है, बल्कि न्याय मिलने की प्रक्रिया को भी मजबूत बनाती है।
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की जांच जारी है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है और आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे।







