अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) लगातार नए तथ्यों की पड़ताल कर रही है। इसी क्रम में मंदिर ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी रहे एक वरिष्ठ पदाधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी तक उनके खिलाफ किसी अपराध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और पूरे मामले की जांच जारी है।
सूत्रों के अनुसार, अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान पूर्व ट्रस्टी का नाम कई बार सामने आया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि मंदिर में कर्मचारियों की नियुक्ति, दान राशि की निगरानी और प्रशासनिक निर्णयों में उनकी भूमिका क्या थी। एसआईटी पहले ही उनसे पूछताछ कर चुकी है और उनके बयानों का मिलान अन्य आरोपियों से मिली जानकारी के साथ किया जा रहा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि मंदिर परिसर में कार्यरत कई कर्मचारियों की नियुक्ति कथित तौर पर पूर्व ट्रस्टी की सिफारिश पर हुई थी। इस पहलू की भी विस्तार से जांच की जा रही है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप थी या नहीं। इसके साथ ही कुछ आरोप ऐसे भी सामने आए हैं कि नौकरी दिलाने के बदले कथित रूप से आर्थिक लाभ लिया गया हो। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और एसआईटी सभी दस्तावेजों एवं साक्ष्यों की जांच कर रही है।
सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियां पूर्व ट्रस्टी की चल-अचल संपत्तियों का भी विवरण जुटा रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि ट्रस्ट से जुड़े रहने के दौरान उनकी संपत्ति में कोई असामान्य वृद्धि हुई या नहीं। यदि वित्तीय रिकॉर्ड में कोई संदिग्ध लेनदेन मिलता है तो उसे भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।
इस मामले में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। आरोप है कि मंदिर में आने वाली दान राशि की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारियों ने सुनियोजित तरीके से नकदी निकालने की साजिश रची। पूछताछ में सामने आया कि नकदी गिनने वाले कक्ष तक पहुंच रखने वाले कुछ लोगों ने कथित रूप से अपनी जिम्मेदारी का दुरुपयोग किया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह पूरी प्रक्रिया लंबे समय से संगठित तरीके से चल रही हो सकती है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपितों ने सीसीटीवी कैमरों की निगरानी से बचने के लिए विशेष रणनीति अपनाई थी। कथित तौर पर एक व्यक्ति नकदी अपने पास रखता था जबकि अन्य लोग उसे चारों ओर से घेर लेते थे, जिससे कैमरों में गतिविधि स्पष्ट रूप से दिखाई न दे। बाद में नकदी को अस्थायी रूप से छिपाकर अवसर मिलने पर बाहर ले जाया जाता था। इन दावों की भी तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुष्टि की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, दान राशि की गिनती वाले कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के केंद्र में है। बताया जा रहा है कि उस कक्ष की चाबियां अलग-अलग जिम्मेदार अधिकारियों के पास रहती थीं। एसआईटी यह भी जांच कर रही है कि क्या सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई थी, जिसके कारण कथित अनियमितताओं को अंजाम देना संभव हुआ।
गौरतलब है कि मंदिर में नकद दान की गिनती अधिकृत बैंक की निगरानी में नियुक्त टीम द्वारा की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में बैंक कर्मियों और मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की संयुक्त भागीदारी होती है। ऐसे में जांच एजेंसियां सभी संबंधित पक्षों से पूछताछ कर रही हैं ताकि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता का आकलन किया जा सके।
फिलहाल एसआईटी साक्ष्यों, वित्तीय दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों के बयानों का गहन विश्लेषण कर रही है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपी जाएगी। तब तक इस मामले में सामने आए सभी आरोप जांच के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।







