राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। मामले में अब नए दावे और जानकारियां सामने आने के बाद पुलिस की जांच और तेज हो गई है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मंदिर ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी चंपत राय ने अपने करीबी सहयोगियों के सामने यह आशंका जताई है कि इस पूरे मामले में उनके पूर्व सहयोगी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसियों की ओर से अभी नहीं की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय का कहना है कि टिन्नू यादव ने उनके विश्वास का लाभ उठाते हुए कथित तौर पर पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया। यह भी दावा किया जा रहा है कि जब मामला उजागर होने की आशंका बढ़ी तो कथित रूप से कुछ जानकारियां बाहर पहुंचाई गईं। फिलहाल इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है।
इस मामले में अब तक कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में टिन्नू यादव के अलावा अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
जांच के दौरान पुलिस ने चंपत राय का भी बयान दर्ज किया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उनसे कब और कितनी देर तक पूछताछ की गई। सूत्रों का कहना है कि जांच अधिकारियों ने उनसे मंदिर में आने वाले दान, उसकी गिनती की प्रक्रिया और उससे जुड़े प्रशासनिक रिकॉर्ड के संबंध में जानकारी मांगी है। जांच एजेंसियां यह समझने का प्रयास कर रही हैं कि दान की पूरी व्यवस्था किस प्रकार संचालित होती थी और उसमें किस-किस की जिम्मेदारी तय थी।
गौरतलब है कि मामला सामने आने के बाद चंपत राय ने 27 जून को राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके साथ ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी अपना पद छोड़ दिया। हालांकि दोनों के इस्तीफे को लेकर ट्रस्ट की ओर से अलग-अलग कारण बताए गए हैं। पुलिस ने हाल ही में सभी आरोपियों के घरों पर भी जांच की कार्रवाई की, जहां से कुछ नकदी और अन्य सामग्री बरामद होने की जानकारी सामने आई है। बरामदगी का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, टिन्नू यादव को मंदिर के दान पात्रों से निकाली गई राशि को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और गिनती की व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई और यदि हुई तो उसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि दान की गिनती वाले कक्ष की दो अलग-अलग चाबियां थीं। एक चाबी कथित रूप से टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक से जुड़े अधिकृत कर्मचारियों के पास होती थी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या इसी व्यवस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
इधर, सोशल मीडिया पर एक तस्वीर भी तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें एक व्यक्ति के हाथों में बड़ी मात्रा में नकदी दिखाई दे रही है। दावा किया जा रहा है कि तस्वीर का संबंध मामले के एक आरोपी के परिवार से है। हालांकि पुलिस ने वायरल तस्वीर की प्रामाणिकता पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है और न ही इसे जांच का अंतिम आधार माना है।







