इसरो के सैटेलाइट से दिखी मानसून की बड़ी दस्तक, उत्तर भारत में बारिश का दौर तेज, गर्मी से मिलेगी राहत

लंबे इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार उत्तर भारत में रफ्तार पकड़ ली है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा जारी ताज़ा सैटेलाइट तस्वीरों में देश के उत्तरी हिस्सों पर घने वर्षा वाले बादलों का व्यापक फैलाव दिखाई दिया है। इन तस्वीरों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मानसून अब निर्णायक रूप से आगे बढ़ चुका है और आने वाले दिनों में उत्तर भारत के अधिकांश क्षेत्रों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

थर्मल इंफ्रारेड सैटेलाइट इमेज में मध्य भारत से लेकर गंगा के मैदानी इलाकों तक घने बादलों की एक मजबूत पट्टी दिखाई दे रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह स्थिति बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं और अरब सागर से उठने वाली मानसूनी हवाओं के संगम के कारण बनी है। यही कारण है कि उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 1 जुलाई को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों और पूर्वी हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में प्रवेश कर लिया। इसके साथ ही कई स्थानों पर गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। मौसम विभाग का मानना है कि अगले 24 से 48 घंटों के दौरान मानसून और तेजी से आगे बढ़ेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस वर्ष जून का महीना पिछले कई दशकों के सबसे शुष्क जून महीनों में शामिल रहा। देश के अनेक राज्यों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई, जिससे भीषण गर्मी, लू और उमस ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी थीं। बारिश में देरी का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी देखने को मिला, क्योंकि कई क्षेत्रों में किसान पर्याप्त नमी का इंतजार कर रहे थे।

अब मानसून के सक्रिय होने से कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। पर्याप्त वर्षा होने पर जलाशयों और भूजल स्तर में भी सुधार देखने को मिल सकता है, जिसका लाभ आने वाले महीनों में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को मिलेगा।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश का दौर शुरू हो सकता है। शुरुआत में तेज हवाओं और बिजली चमकने की संभावना है, जिसके बाद हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। लगातार बारिश के कारण अधिकतम तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आने की संभावना है, जिससे लोगों को लंबे समय से पड़ रही भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।

सैटेलाइट तस्वीरों में यह भी देखा गया है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से नमी से भरपूर हवाएं उत्तर भारत की ओर बढ़ रही हैं। साथ ही मानसून ट्रफ भी अपनी सामान्य स्थिति के करीब पहुंच रही है। मौसम वैज्ञानिक इसे व्यापक और लगातार बारिश के लिए अनुकूल संकेत मान रहे हैं।

वहीं राजस्थान के कई हिस्से अभी भी सक्रिय मानसूनी क्षेत्र से पूरी तरह नहीं जुड़े हैं। हालांकि सैटेलाइट चित्रों में पश्चिम दिशा की ओर तेजी से बढ़ते बादलों का समूह दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में मानसून राज्य के अधिक इलाकों में प्रवेश कर सकता है और वहां भी वर्षा की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि बारिश और आंधी-तूफान के दौरान सावधानी बरतें। तेज हवाओं, जलभराव और बिजली गिरने जैसी परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी ताज़ा अपडेट पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा। यदि वर्तमान मौसम प्रणाली सक्रिय बनी रहती है, तो जुलाई के पहले सप्ताह में उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अच्छी बारिश दर्ज की जा सकती है।

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