ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (Global Passport Index) 2026 की नई रिपोर्ट में भारतीय पासपोर्ट को 197 देशों की सूची में 125वां स्थान मिला है। पिछले वर्ष की तुलना में भारत की रैंकिंग में एक स्थान की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, यदि पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत ने दो स्थान का सुधार किया है। 2021 में भारतीय पासपोर्ट 127वें स्थान पर था, जो अब 125वें स्थान पर पहुंच गया है।
यह रिपोर्ट रेजिडेंसी और सिटिजनशिप सलाहकार संस्था Global Citizen Solutions (GCS) द्वारा जारी की गई है। इस इंडेक्स की खास बात यह है कि यह केवल वीजा-फ्री यात्रा के आधार पर देशों की रैंकिंग तय नहीं करता, बल्कि पासपोर्ट की समग्र उपयोगिता का भी आकलन करता है।
केवल वीजा-फ्री यात्रा नहीं, कई मानकों पर होता है मूल्यांकन
अधिकांश अंतरराष्ट्रीय पासपोर्ट रैंकिंग केवल इस बात पर ध्यान देती हैं कि किसी देश का नागरिक बिना वीजा कितने देशों की यात्रा कर सकता है। लेकिन ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स इससे आगे बढ़कर पासपोर्ट की ताकत को तीन प्रमुख मानकों पर मापता है।
इनमें वैश्विक यात्रा की सुविधा (Enhanced Mobility) को 50 प्रतिशत वेटेज दिया जाता है, जबकि निवेश की संभावनाएं (Investment Index) और जीवन की गुणवत्ता (Quality of Living) को 25-25 प्रतिशत महत्व दिया जाता है। इन तीनों श्रेणियों में कुल 14 अलग-अलग संकेतकों के आधार पर अंतिम रैंकिंग तैयार की जाती है।
भारतीय पासपोर्ट से 26 देशों में वीजा-फ्री या आसान प्रवेश
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट धारक फिलहाल 26 देशों में बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं। इनमें भूटान, नेपाल, जमैका, बारबाडोस, मकाऊ, ट्यूनीशिया, अंगोला और फिलिस्तीन जैसे देश शामिल हैं।
हालांकि, दुनिया के कई प्रमुख देशों की यात्रा के लिए भारतीय नागरिकों को अभी भी पहले से वीजा प्राप्त करना पड़ता है। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, चीन, संयुक्त अरब अमीरात और अंडोरा जैसे देश शामिल हैं।
मोबिलिटी इंडेक्स में भारत की स्थिति कमजोर
ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स की Enhanced Mobility Index श्रेणी में भारत को 136वां स्थान मिला है। यह पिछले वर्ष की तुलना में एक स्थान नीचे है। इसका अर्थ है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सहजता के मामले में भारतीय पासपोर्ट अभी भी कई देशों की तुलना में पीछे है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत भविष्य में और अधिक देशों के साथ वीजा-मुक्त यात्रा या आसान वीजा समझौते करता है, तो इस श्रेणी में उसकी रैंकिंग बेहतर हो सकती है।
पांच वर्षों में स्कोर में सुधार
हालांकि कुल रैंकिंग में इस वर्ष एक स्थान की गिरावट आई है, लेकिन भारत का समग्र स्कोर पिछले पांच वर्षों में अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का संयुक्त स्कोर 45.1 दर्ज किया गया है, जो दर्शाता है कि निवेश, जीवन स्तर और वैश्विक अवसरों के कुछ क्षेत्रों में सुधार हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी देश की पासपोर्ट रैंकिंग केवल यात्रा की सुविधा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी आर्थिक स्थिति, वैश्विक संबंध, निवेश का माहौल और नागरिकों के लिए उपलब्ध अवसर भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्या है इस रिपोर्ट का महत्व?
ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स उन लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है जो विदेश में पढ़ाई, नौकरी, निवेश या स्थायी निवास की योजना बनाते हैं। यह रिपोर्ट यह समझने में मदद करती है कि किसी देश का पासपोर्ट केवल यात्रा का दस्तावेज नहीं, बल्कि वैश्विक अवसरों तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
भारत की रैंकिंग में भले ही इस बार मामूली गिरावट दर्ज हुई हो, लेकिन दीर्घकालिक आंकड़े बताते हैं कि देश की स्थिति धीरे-धीरे बेहतर हो रही है। आने वाले वर्षों में यदि भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आर्थिक विकास और वैश्विक कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करता है, तो पासपोर्ट की वैश्विक रैंकिंग में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।








