ब्रिक्स को आर्थिक सहयोग का नया केंद्र बनाने की रूस की पहल, व्यापार, ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा पर हुई चर्चा
नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में मुलाकात कर भारत-रूस के लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जताई। यह बैठक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले हुई, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अन्य देशों के नेता शामिल होने वाले हैं।
बैठक के दौरान रूस ने ब्रिक्स को पश्चिमी देशों के बनाए नियमों से अलग वैश्विक आर्थिक विकास के लिए एक नए मंच के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, भारत के लिए यह मुलाकात ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब वह अमेरिका, रूस, ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
ब्रिक्स को आर्थिक सहयोग का व्यावहारिक मंच बनाने की तैयारी
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम के कार्यक्रम में कहा कि आज पश्चिमी प्रतिस्पर्धी हर संभव तरीके से अपना पुराना नेतृत्व वापस हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा कई बार ऐसे रूप ले रही है, जो स्वीकार्य नहीं हैं।
पुतिन के मुताबिक, औद्योगिक और लॉजिस्टिक सुविधाओं, पाइपलाइनों तथा अन्य बुनियादी ढांचे पर सीधे हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारों को बाधित करने और जहाजों को जब्त करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया, हालांकि इन दावों के संबंध में उन्होंने कोई विस्तृत उदाहरण नहीं दिया।
रूस के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव ने रॉयटर्स को बताया कि ब्रिक्स अब केवल भू-राजनीतिक समूह के रूप में नहीं, बल्कि व्यावहारिक आर्थिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके तहत कारोबारियों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और निवेशकों के बीच सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ भुगतान प्रणालियों और संयुक्त बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सुधार पर ध्यान दिया जा रहा है।
पश्चिमी व्यापार प्रतिबंधों और शुल्क नीति पर रूस की चिंता
पुतिन ने कहा कि कुछ देशों पर ऐसे प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जिनमें अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने वाले देशों को दूसरे देशों के हितों के अनुसार काम करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने तथाकथित द्वितीयक प्रतिबंधों की धमकियों का भी जिक्र किया।
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि ब्रिक्स को वैश्विक विकास के लिए एक नया और टिकाऊ मंच तैयार करना चाहिए। उनके ये बयान ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की चिंताओं से मेल खाते हैं। इन अधिकारियों ने व्यापार और वित्त से जुड़े एकतरफा कदमों, शुल्क बढ़ाने तथा गैर-शुल्क बाधाओं पर गंभीर चिंता जताई थी।
ब्रिक्स देशों का कहना है कि इस तरह के कदम व्यापार को प्रभावित करते हैं और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।
भारत के लिए अहम है रूस के साथ ऊर्जा सहयोग
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले हुई मोदी-पुतिन की बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंधों को बनाए रखना भी है। अमेरिका ने उन देशों पर अतिरिक्त 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी दी है, जो रूसी तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं। भारत और चीन रूस के ऊर्जा संसाधनों के बड़े खरीदारों में शामिल हैं।
पिछले वर्ष ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उन देशों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की चेतावनी दी थी, जो उनके अनुसार ब्रिक्स की ‘‘अमेरिका-विरोधी नीतियों’’ के साथ खड़े हैं।
ऐसे माहौल में भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर होने वाली बातचीत आर्थिक और कूटनीतिक, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र की स्थिति पर भी चर्चा
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने पश्चिम एशिया तथा काला सागर क्षेत्र में चल रहे संघर्षों पर भी अपने विचार साझा किए। इन संघर्षों का समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर असर पड़ा है।
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में व्यवधान से तेल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, भारतीय नाविकों की सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं।
ब्रिक्स की एकता के सामने चुनौतियां
ब्रिक्स अपने प्रभाव का विस्तार कर अंतरराष्ट्रीय नियमों और संस्थाओं में बदलाव की भूमिका निभाना चाहता है। हालांकि, समूह के भीतर पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर मतभेद भी हैं। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इस क्षेत्रीय विवाद में अलग-अलग पक्षों से जुड़े हुए हैं।
भारत की चुनौती यह है कि वह रूस और ईरान के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को बनाए रखते हुए अमेरिका तथा खाड़ी देशों के साथ भी मजबूत रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी जारी रखे। मोदी-पुतिन की बैठक और आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इसी व्यापक कूटनीतिक संतुलन के बीच हो रहे हैं।
फोटो कैप्शन
नई दिल्ली में मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक आर्थिक सहयोग पर चर्चा की।








