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AMCA प्रोजेक्ट से HAL बाहर क्यों हुआ? रक्षा सचिव ने बताया तकनीकी वजह, 2028 में पहली उड़ान का लक्ष्य

भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) के प्रोटोटाइप निर्माण की दौड़ से सरकारी विमान निर्माता हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) बाहर हो गया है। रक्षा सचिव आरके सिंह के मुताबिक, HAL कुछ अनिवार्य तकनीकी मानदंडों को पूरा नहीं कर सका। उन्होंने इन तकनीकी कमियों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की, लेकिन इसे सामान्य तकनीकी योग्यता से जुड़ा मामला बताया।

यह पहली बार है जब किसी स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजना में HAL को प्रोटोटाइप निर्माण के लिए बाहर रखा गया है।

HAL को लेकर रक्षा सचिव ने क्या कहा?

नई दिल्ली में आयोजित NDTV Defence Summit 2026 में रक्षा सचिव आरके सिंह ने बताया कि HAL कुछ अपेक्षाकृत सामान्य तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने में सफल नहीं रहा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे तकनीकी शर्तें क्या थीं।

AMCA कार्यक्रम में सरकार ने इस बार सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ निजी कंपनियों को भी बड़ी भूमिका देने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य देश में लड़ाकू विमानों के निर्माण की दूसरी उत्पादन लाइन तैयार करना और किसी एक कंपनी पर पूरी तरह निर्भरता कम करना है।

AMCA बनाने की दौड़ में अब तीन दावेदार

शुरुआत में सात कंपनियों या कंसोर्टियम ने AMCA प्रोटोटाइप कार्यक्रम में रुचि दिखाई थी। फरवरी 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार, इनमें से केवल तीन समूह अनिवार्य तकनीकी और वित्तीय मानदंडों को पूरा कर पाए।

अब तीन दावेदार मैदान में हैं:

  • Tata Advanced Systems Limited (TASL)
  • L&T-BEL-Dynamatic का कंसोर्टियम
  • Bharat Forge-BEML-Data Patterns का कंसोर्टियम

इन कंपनियों को मई 2026 के अंत में विस्तृत प्रस्ताव जमा करने के लिए Request for Proposal (RFP) जारी किया गया था।

करीब ₹15,000 करोड़ की लागत से बनेगा प्रोटोटाइप चरण

AMCA के प्रोटोटाइप चरण को केंद्र सरकार पूरी तरह वित्त पोषित कर रही है। इस चरण पर लगभग ₹15,000 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।

चयनित कंपनी को:

  • पांच उड़ान योग्य प्रोटोटाइप बनाने होंगे।
  • एक स्ट्रक्चरल टेस्ट एयरक्राफ्ट तैयार करना होगा।
  • परियोजना के लिए नई कंपनी स्थापित करनी होगी।
  • यह नई कंपनी चयन के बाद तीन महीने के भीतर स्थापित करनी होगी।
  • पहले प्रोटोटाइप की पहली उड़ान का लक्ष्य लगभग 30 महीने रखा गया है।
  • पांचों उड़ान प्रोटोटाइप करीब 64 महीने में तैयार करने का लक्ष्य है।
  • विमानों से लगभग 84 महीने में कुल 1,800 टेस्ट sorties पूरी कराने की योजना है।

AMCA की डिजाइन अथॉरिटी Aeronautical Development Agency (ADA) के पास रहेगी। यानी निजी कंपनी को निर्माण और विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका मिलेगी, लेकिन विमान की मूल डिजाइन संबंधी अधिकार व्यवस्था ADA के नियंत्रण में रहेगी।

शुरुआत में अमेरिकी GE F414 इंजन

AMCA के शुरुआती प्रोटोटाइप में General Electric (GE) के F414 इंजन इस्तेमाल किए जाने की योजना है। यही इंजन भारत के Tejas Mk-2 कार्यक्रम के लिए भी प्रस्तावित है।

AMCA के लिए स्वदेशी इंजन क्षमता विकसित करना भी भारत की लंबी अवधि की रक्षा विमानन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन शुरुआती प्रोटोटाइप चरण में F414 इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा।

सितंबर 2028 में पहली उड़ान का लक्ष्य

रक्षा सचिव आरके सिंह के अनुसार, AMCA के पहले प्रोटोटाइप की पहली उड़ान सितंबर 2028 के आसपास होने की उम्मीद है।

यह कार्यक्रम भारतीय वायुसेना के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के पास वर्तमान में कोई ऑपरेशनल रडार-एवेडिंग स्टील्थ फाइटर नहीं है।

चीन की स्टील्थ फाइटर क्षमता पर नजर

AMCA को भारत की भविष्य की वायु शक्ति के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। रक्षा क्षेत्र से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार चीन ने बड़ी संख्या में पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमानों को अपनी वायुसेना में शामिल किया है, जिनमें J-20 और J-35 जैसे विमान शामिल हैं।

भारत की योजना AMCA के जरिए देश में ही अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर विकसित और निर्मित करने की है। इससे भविष्य में विदेशी लड़ाकू विमानों पर निर्भरता कम करने और घरेलू एयरोस्पेस निर्माण क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है।

भारतीय वायुसेना के पास अभी स्टील्थ फाइटर नहीं

वर्तमान में भारतीय वायुसेना के बेड़े में कोई ऑपरेशनल पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान नहीं है। इसी बीच भारत सीमित संख्या में रूसी Su-57 लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद पर भी विचार कर रहा है।

हालांकि, AMCA का उद्देश्य केवल तत्काल जरूरत पूरी करना नहीं है। यह भारत के लिए एक स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का विकास करने और भविष्य में उसके बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता तैयार करने वाली दीर्घकालिक परियोजना है।

AMCA परियोजना का अगला बड़ा पड़ाव अब प्रोटोटाइप निर्माण के लिए विजेता कंपनी का चयन और उसके बाद सितंबर 2028 की प्रस्तावित पहली उड़ान होगी।

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