– गंगा दशहरा पर हस्त, आनंदादि और सर्वार्थ सिद्धि योग बना
– गंगा में पावन डुबकी लगाने से दस पापों का हो जाता है नाश
– चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात, हाईवे पर जाम की स्थिति, ब्रह्म मुहूर्त से स्नान शुरू, लाखों पहुंचे
हरिद्वार: गंगा के तट पर लाखों श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में गंगा में पावन डुबकी लगा रहे हैं। 25 मई 2026 को गंगा दशहरा पर ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर स्नान और पूजा का शुभ समय सुबह 04:28 बजे से दोपहर तक है। आज के पावन दिन तीन बड़े योग भी बने हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, हस्त नक्षत्र योग, आनंदादि योग सहित कई अन्य योग इस गंगा दशहरा के दिन डुबकी को कई गुणा पुण्य के और भागी बना दे रहे हैं। हस्त नक्षत्र से इस पर्व पर किया गया पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्य अत्यधिक शुभ लाभ देते हैं। आनंदादि योग की गंगा दशहरा पर उपस्थिति से आध्यात्मिक लाभ कई गुना बढ़ जाता है। दूसरी ओर, गंगा दशहरा पर हरिद्वार के हरकी पैड़ी सहित गंगा घाटों पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु डुबकी लगाने को पहुंचे हैं। हाईवे पर जाम की स्थिति बनी रही। चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही। पुलिस के आला अधिकारी हरकी पैड़ी सहित सीसीआर टावर से पल-पल स्नान की मॉनिटरिंग करते रहे।

गंगा दशहरा 2026: आस्था, पौराणिक महत्त्व और दिव्य उत्सव का अद्भुत संगम
भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं में गंगा दशहरा का विशेष स्थान है। यह पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि माँ गंगा के धरती पर अवतरण का पावन स्मरण है। हर वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व श्रद्धा, भक्ति और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। वर्ष 2026 में गंगा दशहरा का उत्सव विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, खासकर हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज जैसे तीर्थस्थलों पर।
गंगा दशहरा 2026 कब है?
वर्ष 2026 में गंगा दशहरा का पर्व 25 मई 2026, सोमवार को मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इसी दिन माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं।
पौराणिक कथा: क्यों हुआ माँ गंगा का अवतरण?
शास्त्रों के अनुसार, राजा सगर के 60,000 पुत्रों का उद्धार करने के लिए राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माँ गंगा पृथ्वी पर आने को तैयार हुईं, लेकिन उनके तीव्र वेग को संभालना असंभव था। तब भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण कर पृथ्वी पर शांत रूप में प्रवाहित किया। इसी दिव्य घटना की स्मृति में गंगा दशहरा मनाया जाता है।
“दशहरा” नाम का अर्थ
“दशहरा” शब्द “दश” और “हरा” से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है — दस प्रकार के पापों का नाश। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और पूजा करने से मनुष्य के दस प्रमुख पाप समाप्त हो जाते हैं और आत्मा को शुद्धि प्राप्त होती है।
धार्मिक महत्व
गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य, मंत्र जाप और दीपदान का विशेष महत्व होता है। भक्तजन प्रातःकाल गंगा नदी में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देते हैं और माँ गंगा की आरती करते हैं।
इस दिन किए जाने वाले प्रमुख कार्य:
- गंगा स्नान
- गंगा आरती
- दीपदान
- दान-पुण्य
- गंगा स्तोत्र और मंत्र जाप
- जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान
हरिद्वार और वाराणसी की दिव्य छटा
हरिद्वार में हर की पौड़ी पर सुबह हुई भव्य गंगा आरती ने लाखों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की। वहीं वाराणसी के घाट दीपों की रोशनी और वैदिक मंत्रों से जगमगा उठा है। देश-विदेश से आए श्रद्धालु माँ गंगा के दर्शन और स्नान के लिए उमड़ पड़े हैं।
पर्यावरण और गंगा संरक्षण का संदेश
गंगा दशहरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें नदियों के संरक्षण का संदेश भी देता है। माँ गंगा करोड़ों लोगों की जीवनरेखा हैं। इस अवसर पर स्वच्छता अभियान, नदी संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

आधुनिक समय में गंगा दशहरा का महत्व

डॉ दीपक शर्मा, ज्योतिषाचार्य (गोल्डमेडलिस्ट), विजय श्री ज्योतिष एवं रत्न केन्द्र, कुशावर्त घाट, हरिद्वार
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह पर्व हमें आध्यात्मिक शांति, प्रकृति के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कृति से जुड़ने का अवसर देता है। गंगा दशहरा हमें यह सिखाता है कि जीवन में पवित्रता, सेवा और करुणा का कितना महत्व है।
ज्येष्ठ माह की संक्रांति, एकादशी, अष्टमी, गंगा दशहरा आदि पर्व पर श्रद्धापूर्वक जल से भरा हुआ घड़ा, गेंहू, चावल, सत्तू, अनाज, दूध, चीनी, वस्त्र, छाता, पंखा आदि दान करने का बड़ा महत्व है। इन पर्वो पर आम, खरबूजा, मौसमी फल दान करने का भी विशेष महत्व है। इस माह में जितेन्द्रिय रहते हुए अल्पहार करते हुए सात्विक भोजन करना चाहिए। यह जीवन में आनंद लेकर आता है।
ऊं नमो भगवते वासुदेवाय का मंत्र जाप करने से धन संपत्ति, विवाह, संतान एवं सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यदि आप गंगा के तट पर नहीं रहते तो अपने शहर के नदी, सरोवर में ईश्वर का स्मरण करते हुए पावन डुबकी जरूरी लगायें।








