Assam की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब राज्य सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) विधेयक पेश किया। यह विधेयक मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री Atul Bora ने सदन में प्रस्तुत किया। विधेयक पेश होते ही विधानसभा में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और विपक्षी दलों के विधायकों ने इसका विरोध जताया।
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों से जुड़े नियमों में समानता लाना है। प्रस्तावित यूसीसी के तहत विवाह की न्यूनतम आयु तय करने, बहुविवाह पर रोक लगाने, महिलाओं को समान उत्तराधिकार अधिकार देने और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।
विधानसभा में विधेयक पेश होने के दौरान विपक्षी सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह विषय संवेदनशील है और इसे लेकर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि कानून सामाजिक सुधार और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सूत्रों के अनुसार विधानसभा का सत्र एक दिन बढ़ाया गया है और इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा मंगलवार को होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूसीसी को लेकर सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि राज्य के जनजातीय समुदायों को इस कानून के कुछ प्रावधानों से छूट दी जाएगी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में रहने वाली आदिवासी आबादी की पारंपरिक व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान किया जाएगा।
राज्य सरकार का तर्क है कि वर्तमान में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, जिससे कई बार महिलाओं और कमजोर वर्गों को समान अधिकार नहीं मिल पाते। ऐसे में एक समान कानून लागू करने से सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूसीसी का मुद्दा लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों में भी समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही गई है। हालांकि धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता वाले देश में इसे लागू करना हमेशा से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है।
यदि यह विधेयक पारित होता है तो Assam यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने वाला देश का तीसरा राज्य बन जाएगा। इससे पहले Uttarakhand और Gujarat में भी इस विषय पर पहल हो चुकी है।
विपक्षी दलों का कहना है कि इस तरह के कानूनों को लागू करने से पहले सभी समुदायों के साथ व्यापक संवाद होना चाहिए। वहीं सरकार का दावा है कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यूसीसी का मुद्दा असम की राजनीति में प्रमुख विषय बन सकता है। विधानसभा में होने वाली चर्चा और विपक्ष की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।








