प्रधानमंत्री Narendra Modi इज़राइल की महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो गए हैं। इस दौरे के दौरान वह इज़राइल की संसद Knesset को संबोधित करेंगे। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।
इस यात्रा का उद्देश्य भारत और Israel के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करना है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंध रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़े हैं।
प्रधानमंत्री के संबोधन को द्विपक्षीय संबंधों के लिए अहम माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों, साझा हितों और वैश्विक चुनौतियों पर दोनों देशों की साझी सोच को रेखांकित करेंगे। साथ ही, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हो सकती है।
इस दौरे के दौरान उच्च स्तरीय बैठकों और समझौतों की भी संभावना है। रक्षा सहयोग और उन्नत तकनीकी साझेदारी जैसे मुद्दे एजेंडे में शामिल बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।
भारत और इज़राइल के बीच 1992 में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। तब से लेकर अब तक दोनों देशों के रिश्तों में लगातार मजबूती आई है। प्रधानमंत्री का यह संबोधन द्विपक्षीय सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, यह दौरा भारत-इज़राइल संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।









