लेह-लद्दाख में 5.5 तीव्रता का भूकंप, सुबह-सुबह कांपी धरती; 10 किमी गहराई पर था केंद्र

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह में गुरुवार, 13 अगस्त 2026 की सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक भूकंप की तीव्रता 5.5 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। भूकंप सुबह करीब 6 बजकर 5 मिनट पर आया और इसका केंद्र जमीन के भीतर महज 10 किलोमीटर की गहराई पर था। फिलहाल भूकंप से किसी तरह के बड़े नुकसान या जनहानि की तत्काल सूचना नहीं मिली है।

6 बजे के आसपास महसूस हुए तेज झटके

NCS के आधिकारिक भूकंप रिकॉर्ड के अनुसार, भूकंप का समय 06:05:15 IST था। इसका अक्षांश 36.881° उत्तर और देशांतर 74.402° पूर्व दर्ज किया गया। भूकंप का स्थान लेह, लद्दाख बताया गया है। NCS के रिकॉर्ड में इस घटना को समीक्षा के बाद दर्ज किया गया है और इसे महसूस किए गए भूकंप के रूप में चिह्नित किया गया है।

सुबह के समय आए झटकों के कारण स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए घबराहट की स्थिति बनी। हालांकि, उपलब्ध शुरुआती जानकारी के अनुसार किसी बड़े भवन के क्षतिग्रस्त होने या लोगों के घायल होने की खबर सामने नहीं आई है।

10 किलोमीटर की गहराई पर था भूकंप का केंद्र

इस भूकंप की सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी कम गहराई है। NCS के मुताबिक भूकंप का केंद्र धरती की सतह से करीब 10 किलोमीटर नीचे था। सामान्य तौर पर कम गहराई पर आने वाले भूकंपों में सतह पर कंपन अधिक महसूस हो सकता है। हालांकि किसी भूकंप से वास्तविक नुकसान कितना होगा, यह केवल उसकी तीव्रता पर निर्भर नहीं करता। इसमें केंद्र की दूरी, स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियां और इमारतों की संरचना जैसे कई कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं।

अब तक जान-माल के नुकसान की खबर नहीं

भूकंप के बाद शुरुआती रिपोर्टों में किसी मौत या बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भूकंप के बाद किसी भी संभावित आफ्टरशॉक या नए झटके की स्थिति में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

हिमालयी क्षेत्र में क्यों आते हैं भूकंप?

लद्दाख हिमालयी क्षेत्र का हिस्सा है और यह इलाका भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में आता है। भारतीय प्लेट के उत्तर की ओर बढ़ने और यूरेशियन प्लेट के साथ उसकी टक्कर से हिमालयी क्षेत्र में लगातार भूगर्भीय गतिविधियां होती रहती हैं। इसी कारण हिमालय और इसके आसपास के क्षेत्रों में समय-समय पर भूकंप महसूस किए जाते हैं।

भूकंप की तीव्रता को मैग्नीट्यूड में मापा जाता है। 5.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप मध्यम से तेज श्रेणी का झटका माना जा सकता है, लेकिन इससे होने वाला वास्तविक प्रभाव स्थान और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

भूकंप आने पर क्या करें?

भूकंप के दौरान घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर जाना सबसे जरूरी है। यदि आप किसी इमारत के अंदर हैं तो खिड़कियों, भारी सामान और ऐसी वस्तुओं से दूर रहें जो गिर सकती हैं। मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे जाकर सिर और गर्दन को सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है।

भूकंप के दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। झटके रुकने के बाद यदि इमारत में नुकसान दिखाई दे तो सुरक्षित तरीके से बाहर निकलें और बिजली या गैस से जुड़े संभावित खतरों से सावधान रहें।

NCS ने दर्ज की पूरी जानकारी

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र भारत में भूकंप की निगरानी और उनसे संबंधित वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने वाली प्रमुख सरकारी संस्था है। लेह में आए इस भूकंप के संबंध में NCS के रिकॉर्ड में तीव्रता 5.5, समय 06:05:15 IST और गहराई 10 किलोमीटर दर्ज है।

फिलहाल प्रशासन की नजर स्थिति पर बनी हुई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार लेह में 5.5 तीव्रता के इस भूकंप से किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संभावित आफ्टरशॉक को देखते हुए स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

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