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ईरान युद्ध का असर: गैस संकट से ठप हुआ गुजरात का सिरेमिक उद्योग, लाखों मजदूर प्रभावित

गुजरात के मोरबी में स्थित भारत का सबसे बड़ा सिरेमिक उद्योग इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रहा है। ईरान से जुड़े वैश्विक तनाव और युद्ध की स्थिति के चलते गैस आपूर्ति बाधित हो गई है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है। उद्योग से जुड़े संगठनों के अनुसार, गैस की कमी के कारण पिछले कई दिनों से अधिकांश फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं।

मोरबी को भारत का सिरेमिक हब कहा जाता है, जहां देश के कुल सिरेमिक उत्पादों का लगभग 80% निर्माण होता है। यहां बनने वाले टाइल्स, सैनिटरीवेयर और अन्य उत्पाद न केवल देशभर में बल्कि मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी निर्यात किए जाते हैं। लेकिन मौजूदा हालात ने इस मजबूत उद्योग की रफ्तार को अचानक थाम दिया है।

उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सिरेमिक उत्पादन में प्राकृतिक गैस और प्रोपेन बेहद जरूरी ईंधन हैं। इनकी आपूर्ति में कमी आने से भट्टियां चलाना मुश्किल हो गया है, जिससे उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया। गैस की कीमतों में भी भारी उछाल देखा जा रहा है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है और छोटे उद्योगों के लिए संचालन करना लगभग असंभव हो गया है।

इस संकट का सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर पड़ा है। अनुमान के मुताबिक, इस उद्योग से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लगभग 4 लाख श्रमिकों की आजीविका प्रभावित हुई है। कई मजदूर अपने गांव लौटने को मजबूर हो गए हैं, जबकि जो बचे हैं वे काम की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से जुड़ा है। हाल ही में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया, जिसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली गैस आपूर्ति बाधित हो गई। यह मार्ग भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत है, इसलिए इसका असर देश के कई उद्योगों पर पड़ रहा है।

सरकार और उद्योग जगत इस स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक ईंधन और आपूर्ति स्रोतों की तलाश कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक इस तरह की चुनौतियां बनी रह सकती हैं।

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