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होरमुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव, ईरान की कार्रवाई से शांति प्रयासों पर असर

मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है, जब ईरान द्वारा होरमुज़ जलडमरूमध्य में तीन जहाजों पर हमले की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में चल रहे शांति प्रयासों को झटका दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के अर्धसैनिक बल, जिन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नाम से जाना जाता है, ने बुधवार को तीसरे जहाज को निशाना बनाया। इससे पहले दो अन्य जहाजों को भी निशाना बनाकर कब्जे में लिया गया था। इन घटनाओं के बाद वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है।

इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा रहा है। हालांकि, ईरान ने इस विस्तार को स्वीकार तो किया है, लेकिन उसने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह नई शांति वार्ता में शामिल होगा या नहीं। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी अभी भी बनी हुई है।

दूसरी ओर, इज़राइल और लेबनान के बीच वॉशिंगटन में नई वार्ता का दौर शुरू होने जा रहा है। इन वार्ताओं में लेबनान एक महीने के लिए युद्धविराम बढ़ाने की मांग कर सकता है, क्योंकि मौजूदा समझौता जल्द ही समाप्त होने वाला है। इज़राइल ने वार्ता से पहले बयान दिया है कि उसे लेबनान के साथ कोई बड़ा मतभेद नहीं है और दोनों देशों को मिलकर क्षेत्र में शांति बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए।

हालांकि, इन वार्ताओं में हिज़्बुल्लाह की अनुपस्थिति एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। यह संगठन ईरान समर्थित माना जाता है और उसने इन बातचीतों का विरोध भी किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सभी प्रमुख पक्ष एक साथ नहीं बैठते, तब तक स्थायी समाधान निकलना मुश्किल होगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक समुदाय को सतर्क कर दिया है। तेल आपूर्ति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। कई देशों ने संयम बरतने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

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