लखनऊ अग्निकांड: तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने उजाड़ीं कई जिंदगियां, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

Screenshot 2026 06 23 105909

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुई भीषण आग की घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। शहर के उत्तरी क्षेत्र स्थित उषा मेहता मार्ग पर बनी एक तीन मंजिला इमारत में लगी आग में 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश छात्र बताए जा रहे हैं। घटना के बाद इमारत का दृश्य किसी खंडहर से कम नहीं दिखाई देता। जली हुई दुकानें, कालिख से भरी सीढ़ियां और टूटे हुए हिस्से इस दर्दनाक हादसे की भयावह कहानी बयां कर रहे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग सबसे पहले इमारत की दूसरी मंजिल पर स्थित एक कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र में लगी। कुछ ही समय में आग ने पूरी मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया और फिर तेजी से अन्य हिस्सों में फैल गई। जिस प्रशिक्षण केंद्र में छात्र अपने भविष्य को संवारने के लिए पढ़ाई करने आते थे, वह अब पूरी तरह राख में तब्दील हो चुका है। वहां रखे कंप्यूटर, फर्नीचर और अन्य सामान बुरी तरह जल गए।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इमारत में आपातकालीन निकास द्वार नहीं था। इसके अलावा, छत तक जाने वाला रास्ता भी बाधित था। सबसे बड़ी समस्या यह रही कि प्रशिक्षण केंद्र के प्रवेश द्वार पर बायोमेट्रिक लॉक लगा था, जो बिजली और इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली पर आधारित था। आग लगने के बाद यह प्रणाली काम करना बंद कर गई, जिससे अंदर मौजूद कई छात्र बाहर नहीं निकल सके।

अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश लोगों की मौत दम घुटने के कारण हुई। वहीं कुछ छात्रों ने अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों से छलांग लगाई, जिसके कारण वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि एक कमरे के पास स्थित दरवाजा पूरी तरह जाम हो गया था, जिसके कारण बचाव दल को दीवार तोड़कर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालना पड़ा। इसी स्थान से सबसे अधिक शव बरामद किए गए।

जांच में यह भी सामने आया है कि जिस भवन में यह हादसा हुआ, उसे वर्ष 2014 में आवासीय भवन के रूप में स्वीकृति मिली थी। हालांकि बाद में इसका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाने लगा। यहां दुकानें और प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे थे। अब प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि आवासीय भवन को व्यावसायिक उपयोग की अनुमति कैसे मिली और सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई।

घटना के बाद प्रशासन ने इमारत को सील कर दिया है। फोरेंसिक विशेषज्ञों और अग्निशमन विभाग की टीमों ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र करना शुरू कर दिया है। साथ ही भवन निर्माण से जुड़े दस्तावेजों और अनुमतियों की भी जांच की जा रही है।

राज्य सरकार ने इस पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों को यह पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि हादसे के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है और सुरक्षा नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया। मृतकों के परिजनों को सहायता राशि देने पर भी विचार किया जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

🔮 आज का राशिफल