एल-69 बैठक में जयशंकर ने UNSC सुधार की जरूरत पर जताई चिंता, कहा- बदलावों का सबसे ज्यादा असर ग्लोबल साउथ पर पीएम मोदी आज सेवा संकल्प अभियान के प्रतिभागियों से करेंगे संवाद, वडनगर से वाराणसी तक जारी है सेवा यात्रा भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने की बड़ी उपलब्धि, सर्वाधिक शुगर रिकवरी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार विश्व आयुर्वेद दिवस: पीएम मोदी के विजन पर आगे बढ़ा पतंजलि, हरिद्वार में खुला देश का पहला आयुर्वेद गुरुकुलम् मंच पर मुख्यमंत्री से लेकर कांग्रेस विधायक तक के हाथ में पहुंचा ‘वही’ पतंजलि घी, फिर स्वामी रामदेव ने जो कहा… पीएम मोदी ने उडुपी में श्री श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामीजी से की मुलाकात, विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी का लोगो किया जारी

मराठी भाषा को लेकर विवाद तेज, अमित ठाकरे की कैब और ऑटो चालकों को चेतावनी- ‘हिंदी में बात की तो पिटाई होगी’

महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब चालकों के लिए मराठी भाषा के ज्ञान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) नेता अमित ठाकरे ने कथित तौर पर हिंदी में बात करने या यात्रियों के साथ बदसलूकी करने वाले ऑटो-रिक्शा चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

अमित ठाकरे, MNS प्रमुख राज ठाकरे के बेटे हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब चालकों को कार्यात्मक यानी रोजमर्रा के कामकाज लायक मराठी सीखने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय देने का फैसला किया है।

‘हिंदी में बोलने पर करेंगे कार्रवाई’

अमित ठाकरे ने कहा कि यदि उनकी पार्टी के संज्ञान में यह मामला आता है कि कोई ऑटो चालक यात्रियों से हिंदी में बात कर रहा है या उनके साथ अभद्र व्यवहार कर रहा है, तो MNS कार्यकर्ता उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

उन्होंने कहा कि यात्रियों को परेशान करने वाले चालकों को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। अमित ठाकरे ने यह भी कहा कि किसी यात्री से यह नहीं कहा जाना चाहिए कि उसे उत्तर प्रदेश की भाषा या हिंदी में ही बात करनी होगी।

उनका कहना था कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए और लोगों को यह बात समझनी होगी।

अमित ठाकरे के इस बयान ने महाराष्ट्र में भाषा को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

फडणवीस सरकार पर भी साधा निशाना

MNS नेता ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस फैसले पर भी सवाल उठाया, जिसके तहत ऑटो और कैब चालकों को कार्यात्मक मराठी सीखने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय दिया गया है।

अमित ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार का फैसला मराठी भाषा से ज्यादा राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित हो सकता है। उन्होंने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि इसी वजह से सरकार ने चालकों को अतिरिक्त समय दिया है।

उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि सरकार चाहे तो चालकों को 10 या 15 साल का समय भी दे सकती है। उनके मुताबिक, इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार को मराठी भाषा और महाराष्ट्र के प्रति कितना लगाव है।

अमित ठाकरे ने यह भी कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में लोगों का अपनी स्थानीय भाषा के प्रति गहरा जुड़ाव है। उन्होंने गुजरात, पंजाब और दक्षिण भारतीय राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी स्थानीय भाषाओं को विशेष महत्व दिया जाता है।

सरकार ने क्यों दिया एक साल का समय?

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों ने सरकार से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था। उनका तर्क था कि इस क्षेत्र में अलग-अलग उम्र और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के लोग काम करते हैं, इसलिए सभी चालकों के लिए तुरंत कार्यात्मक मराठी सीखना आसान नहीं हो सकता।

सरकार के फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद के साथ-साथ कानूनी चुनौती भी सामने आई है।

बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा मामला

मराठी भाषा से संबंधित सरकार के आदेश को चार कैब चालकों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी है। यानी इस मुद्दे पर अब राजनीतिक बहस के साथ कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।

महाराष्ट्र सरकार ने 12 अगस्त से व्यावसायिक यात्री वाहनों के चालकों के लिए मराठी का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य करने का प्रावधान किया था। इसमें ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चलाने वाले ड्राइवर भी शामिल हैं।

नियमों के मुताबिक, यदि कोई चालक कार्यात्मक मराठी का ज्ञान साबित करने में असफल रहता है तो उसकी ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी अनुमति को तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर परमिट स्थायी रूप से रद्द किए जाने तक की कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।

भाषा के मुद्दे पर बढ़ रही सियासत

महाराष्ट्र में मराठी भाषा और स्थानीय पहचान का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। MNS इस मुद्दे को अपनी राजनीति के प्रमुख आधारों में रखती है।

सरकार के नए नियम, चालकों को दी गई अतिरिक्त समय-सीमा और अमित ठाकरे के तीखे बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। अब इस मामले में राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी के साथ-साथ अदालत में चल रही चुनौती पर भी नजर रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

🔮 आज का राशिफल