एल-69 बैठक में जयशंकर ने UNSC सुधार की जरूरत पर जताई चिंता, कहा- बदलावों का सबसे ज्यादा असर ग्लोबल साउथ पर पीएम मोदी आज सेवा संकल्प अभियान के प्रतिभागियों से करेंगे संवाद, वडनगर से वाराणसी तक जारी है सेवा यात्रा भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने की बड़ी उपलब्धि, सर्वाधिक शुगर रिकवरी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार विश्व आयुर्वेद दिवस: पीएम मोदी के विजन पर आगे बढ़ा पतंजलि, हरिद्वार में खुला देश का पहला आयुर्वेद गुरुकुलम् मंच पर मुख्यमंत्री से लेकर कांग्रेस विधायक तक के हाथ में पहुंचा ‘वही’ पतंजलि घी, फिर स्वामी रामदेव ने जो कहा… पीएम मोदी ने उडुपी में श्री श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामीजी से की मुलाकात, विश्वेश तीर्थ स्वामीजी की जन्म शताब्दी का लोगो किया जारी

नेपाल में तबाही का खौफनाक वीडियो आया सामने, कुछ ही सेकंड में नदी किनारे बसा पूरा गांव मलबे में हुआ तब्दील

नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण फ्लैश फ्लड की भयावहता अब सामने आए एक वीडियो से साफ दिखाई दे रही है। वीडियो में तेज बहाव के साथ आया पानी, कीचड़ और मलबा नदी किनारे बसे पूरे इलाके को कुछ ही सेकंड में अपनी चपेट में लेता नजर आ रहा है। इस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और 1,400 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।

नेपाल के रसुवा जिले और आसपास के सीमा क्षेत्र में बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि मौसम सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन अचानक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है और पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा बस्तियों की ओर बढ़ने लगता है।

देखते ही देखते बह गया पूरा नदी किनारे का इलाका

वीडियो में भोतेकोशी और त्रिशूली नदियों के आसपास बसे इलाकों में बाढ़ का बेहद तेज प्रवाह दिखाई देता है। पानी और कीचड़ नदी के किनारों को पार करते हुए घरों, सड़कों और दूसरी संरचनाओं तक पहुंच जाता है।

तेज बहाव अपने साथ मिट्टी, पत्थर और अन्य मलबा लेकर आया, जिससे कई वाहन और पुल इसकी चपेट में आ गए। कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और कुछ इलाकों में मोटी परत में कीचड़ जमा हो गया।

कुछ ही देर में जहां पहले नदी किनारे बस्ती और सड़कें नजर आ रही थीं, वहां सिर्फ मलबा और कीचड़ दिखाई देने लगा। बाढ़ का पानी इसके बाद नदी के निचले हिस्सों की ओर बढ़ता चला गया।

आधे घंटे में 9 मीटर तक बढ़ा नदी का जलस्तर

काठमांडू स्थित International Centre for Integrated Mountain Development (ICIMOD) से जुड़े जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, इस फ्लैश फ्लड के पीछे ग्लेशियर से जुड़ी किसी घटना या हिमस्खलन की भूमिका होने की आशंका है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, त्रिशूली नदी का जलस्तर एक समय पर केवल आधे घंटे के भीतर करीब 9 मीटर तक बढ़ गया। इतनी तेजी से जलस्तर बढ़ने के कारण प्रभावित इलाकों में लोगों को संभलने या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए बेहद कम समय मिला।

नेपाल के अधिकारियों के अनुसार, आपदा के कारण दर्जनों पुल नष्ट हुए हैं, जबकि करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इससे राहत एवं बचाव दलों के लिए प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना और लापता लोगों की तलाश करना मुश्किल हो गया है।

1,400 से ज्यादा लोग लापता

इस प्राकृतिक आपदा में मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। उपलब्ध अपडेट के अनुसार, 392 लोगों की मौत की पुष्टि की गई थी, जबकि 1,400 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई।

आपदा का असर नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र के साथ-साथ नदी के निचले इलाकों में भी पड़ा है। कई बस्तियों के प्रभावित होने के कारण राहत एवं बचाव अभियान बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है।

290 भारतीय नागरिकों से अब तक संपर्क नहीं

नेपाल में जारी राहत एवं बचाव अभियान के बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने भी भारतीय नागरिकों को लेकर जानकारी साझा की है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में मौजूद 290 भारतीय नागरिकों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है, जबकि 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।

लापता भारतीयों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए लोगों के समूह, त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी और भारत के अलग-अलग राज्यों से नेपाल पहुंचे पर्यटक शामिल हैं।

भारतीय अधिकारी नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर इन लोगों का पता लगाने तथा प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।

हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता प्राकृतिक जोखिम

विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, बर्फ और जल प्रणालियों में होने वाले बदलाव भविष्य में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं। हिमालय को अक्सर पृथ्वी का ‘थर्ड पोल’ भी कहा जाता है, क्योंकि यहां बड़ी मात्रा में बर्फ और ग्लेशियर मौजूद हैं और इसका असर एशिया की कई प्रमुख नदियों पर पड़ता है।

जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान और ग्लेशियरों में हो रहे बदलावों को लेकर वैज्ञानिक लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं। हिमालयी क्षेत्र में किसी ग्लेशियर, झील या बर्फीली संरचना में अचानक बदलाव होने पर नीचे की ओर बसे इलाकों में तेज बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

2025 में भी आई थी ऐसी तबाही

नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में इससे पहले भी अगस्त 2025 में इसी तरह की गंभीर बाढ़ की घटना सामने आई थी। उस समय तिब्बत में एक ग्लेशियल झील के पानी के बढ़ने और उसके बाहर निकलने से फ्लैश फ्लड की स्थिति बनी थी।

उस घटना में 9 लोगों की मौत हुई थी और नेपाल-चीन संपर्क को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण पुल सहित कई बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा था।

ताजा आपदा ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाली आबादी और वहां मौजूद महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। फिलहाल नेपाल में बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाने में जुटे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

🔮 आज का राशिफल