UP Voter List: पीलीभीत में 10,470 एंट्री में गड़बड़ी, पूरे यूपी में जांच के आदेश
पीलीभीत, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट की जांच में 10,470 प्रविष्टियों में अनियमितताएं पाई गई हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि मतदाताओं के नाम और अन्य विवरण बदलने के लिए फॉर्म-8 से जुड़ी जरूरी आवेदन प्रतियां और दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। मामला सामने आने के बाद चुनाव अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू कर दी है। अब पूरे उत्तर प्रदेश में ऐसी गड़बड़ियों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
कैसे सामने आया वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मामला?
यह मामला मतदाता पहचान पत्र यानी EPIC नंबर से जुड़ी शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत में कहा गया था कि पहचान पत्र के नंबर के साथ दर्ज नाम और पिता के नाम में बदलाव दिखाई दे रहे हैं।
समाजवादी पार्टी की ओर से भी इस मुद्दे को उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने उठाया गया था। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने पीलीभीत के जिला प्रशासन से जांच कर रिपोर्ट मांगी।
प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद पूरे विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची की पड़ताल की गई। इस प्रक्रिया में हजारों ऐसी प्रविष्टियां मिलीं, जिनमें सुधार की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।
13,779 आवेदन दर्ज, लेकिन जरूरी रिकॉर्ड नहीं मिले
जांच रिपोर्ट के अनुसार, 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच मतदाता विवरण में सुधार के लिए फॉर्म-8 के 13,779 आवेदन सिस्टम में दर्ज किए गए थे। इनमें से 10,470 आवेदनों को मंजूरी दी गई, जबकि 3,309 आवेदन अस्वीकृत हुए।
अधिकारियों के मुताबिक, इन प्रविष्टियों से संबंधित भौतिक आवेदन फॉर्म और सहायक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिले। इसी वजह से मंजूर की गई 10,470 प्रविष्टियों में अनियमितताएं पाई गईं।
फॉर्म-8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम, पता और अन्य विवरणों में सुधार के लिए किया जाता है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन और जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाना आवश्यक है।
दो चुनाव अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटर पर कार्रवाई
मामले की जांच के बाद संबंधित चुनाव अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका पर सवाल उठे हैं। अधिकारियों ने दो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और विभागीय कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर को सेवा से हटाने की कार्रवाई भी की गई है।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
मामले में FIR दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
अब पूरे उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट की जांच
पीलीभीत में अनियमितताएं सामने आने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रदेशभर में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी बिना उचित दस्तावेजों के मतदाता विवरण में बदलाव तो नहीं किए गए।
इसके साथ ही संबंधित अवधि में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल किए गए फॉर्म-6 और मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल किए गए फॉर्म-7 की प्रविष्टियों की भी जांच की जा रही है।
प्रशासन को रिकॉर्ड की पड़ताल करके रिपोर्ट देने और नियमों के अनुसार गलत प्रविष्टियों में सुधार करने को कहा गया है।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी क्यों है गंभीर मामला?
मतदाता सूची में दर्ज जानकारी चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नाम, पहचान संख्या या अन्य विवरणों में गलत बदलाव से मतदाता को अपनी पहचान साबित करने या मतदान करने में परेशानी हो सकती है।
इसी कारण चुनाव अधिकारियों के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि प्रत्येक बदलाव निर्धारित आवेदन, दस्तावेज और सत्यापन प्रक्रिया के अनुसार हो। पीलीभीत में सामने आया मामला अब प्रदेश के अन्य जिलों की मतदाता सूचियों की जांच का आधार बन गया है।
निष्कर्ष: पीलीभीत में 10,470 मतदाता प्रविष्टियों में अनियमितताएं मिलने के बाद चुनाव प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। अब पूरे उत्तर प्रदेश में जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि ऐसी गड़बड़ियां अन्य क्षेत्रों में भी हुई हैं या नहीं और मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए क्या कदम उठाने होंगे।
नोट: यह खबर 23 अक्टूबर 2026 तक प्रकाशित रिपोर्टों और अधिकारियों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है।








