प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान और छात्र आदान-प्रदान के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। दोनों देशों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा और तकनीकी सहयोग को प्राथमिकता दी गई।
संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया लंबे समय से भारतीय छात्रों के लिए सबसे पसंदीदा देशों में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के कैंपस खुलने से दोनों देशों के बीच ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग का नया अध्याय शुरू हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में छात्र, पेशेवरों और पर्यटकों के आदान-प्रदान को और बढ़ावा देने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे। उनका मानना है कि इससे शिक्षा के साथ-साथ आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत होंगे।
ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साथ साझेदारी को बताया ऐतिहासिक
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, शिक्षा और तकनीक जैसे कई क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के विश्वविद्यालय, उद्योग और नागरिकों के बीच मजबूत संबंध भविष्य में आर्थिक विकास और नए रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
माइनिंग सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट के लिए नई पहल
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारत के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया सरकार के टेक्निकल एंड फर्दर एजुकेशन (TAFE) सिस्टम के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते के तहत भारत में माइनिंग और माइनिंग इक्विपमेंट, टेक्नोलॉजी एंड सर्विसेज (METS) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी। इस केंद्र का उद्देश्य आधुनिक खनन तकनीक, कौशल प्रशिक्षण और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करना है।
भारतीय छात्रों को मिल सकता है बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग भारतीय छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई, रिसर्च और व्यावसायिक प्रशिक्षण के नए अवसर उपलब्ध करा सकता है। साथ ही ऑस्ट्रेलियाई संस्थानों के भारत में विस्तार से छात्रों को बेहतर शिक्षा अपने देश में ही प्राप्त करने का विकल्प मिलेगा।
दोनों देशों के संबंधों को मिलेगी नई दिशा
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ता सहयोग केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। दोनों देश व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा और नवाचार के क्षेत्रों में भी साझेदारी को लगातार मजबूत कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया समझौते भविष्य में दोनों देशों के आर्थिक और शैक्षणिक संबंधों को नई ऊंचाई देने में अहम भूमिका निभाएंगे।








