नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के विकास बजट को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली है। भारत सरकार ने हाल ही में कहा कि जम्मू-कश्मीर के लिए आवंटित विकास बजट पाकिस्तान को मिले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के बेलआउट पैकेज से भी अधिक है। इस बयान को पाकिस्तान पर तंज के तौर पर देखा जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल और डिजिटल कनेक्टिविटी पर बड़े पैमाने पर निवेश किया है। सरकार का दावा है कि क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं और आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
भारत की ओर से यह भी कहा गया कि पाकिस्तान अपनी आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है और उसे बार-बार IMF से वित्तीय सहायता लेनी पड़ रही है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के विकास पर सवाल उठाना वास्तविकता से दूर है। भारतीय पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां का विकास पूरी तरह देश की आंतरिक प्राथमिकता है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी क्षेत्र के विकास बजट की तुलना किसी देश के बेलआउट पैकेज से करना राजनीतिक संदेश देने का एक तरीका हो सकता है। पाकिस्तान पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक संकट, महंगाई और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी जैसी समस्याओं से जूझता रहा है, जिसके चलते उसे IMF से राहत पैकेज लेना पड़ा।
जम्मू-कश्मीर में हाल के वर्षों में कई नई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। सरकार का कहना है कि पर्यटन, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे हैं। वहीं विपक्षी दल इस दावे की स्वतंत्र समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह बयान दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक तनाव का एक और उदाहरण माना जा रहा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कूटनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज हो सकती हैं।








