भारतीय सशस्त्र बलों के लिए लंबे समय से प्रस्तावित थिएटर कमांड प्रणाली (Theatre Command System) अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। करीब दो दशक से इस पर चर्चा और मंथन चल रहा था, लेकिन अब रक्षा मंत्रालय के स्तर पर इसे लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि यदि इस योजना को मंजूरी मिलती है, तो भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के संचालन के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
क्या है थिएटर कमांड प्रणाली?
वर्तमान व्यवस्था में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों अपनी-अपनी कमांड संरचना के तहत अलग-अलग तरीके से प्रशिक्षण, योजना और संचालन करती हैं। किसी भी सैन्य चुनौती के समय तीनों सेनाएं आपसी समन्वय के साथ काम करती हैं।
प्रस्तावित थिएटर कमांड प्रणाली में इन तीनों सेनाओं के संसाधनों और क्षमताओं को एकीकृत किया जाएगा। किसी विशेष क्षेत्र या रणनीतिक जिम्मेदारी के लिए एक संयुक्त कमांड बनाई जाएगी, जिसका नेतृत्व एक वरिष्ठ अधिकारी करेगा। इसके तहत तीनों सेनाएं एक साझा कमांड के निर्देशों के अनुसार संयुक्त रूप से अभियान संचालित करेंगी।
तीन प्रमुख थिएटर कमांड का प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार, मौजूदा प्रस्ताव में तीन प्रमुख थिएटर कमांड बनाने की योजना है—
- उत्तरी थिएटर कमांड – चीन सीमा से जुड़े क्षेत्रों की सुरक्षा और संचालन पर केंद्रित।
- पश्चिमी थिएटर कमांड – पाकिस्तान सीमा और पश्चिमी मोर्चे की जिम्मेदारी संभालेगा।
- समुद्री थिएटर कमांड – भारतीय समुद्री सीमाओं, तटीय सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक गतिविधियों की निगरानी करेगा।
इन सभी कमांड का नेतृत्व चार-स्टार रैंक के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी करेंगे।
रक्षा व्यवस्था में क्यों माना जा रहा है अहम कदम?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध की परिस्थितियों में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है। संयुक्त कमांड प्रणाली से निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो सकती है और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव होगा।
इसके अलावा किसी भी आपात स्थिति में अलग-अलग सेनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने में लगने वाला समय कम हो सकता है, जिससे अभियान अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकेंगे।
कई वर्षों से चल रही थी चर्चा
भारत में थिएटर कमांड प्रणाली पर पिछले लगभग 20 वर्षों से विभिन्न स्तरों पर विचार-विमर्श होता रहा है। इस दौरान कई समितियों ने अपनी रिपोर्टें दीं और सैन्य नेतृत्व ने भी समय-समय पर इस विषय पर सुझाव दिए।
हाल के महीनों में इस योजना पर तेजी से काम हुआ है। नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की नियुक्ति के बाद इस दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी है और अब प्रस्ताव अंतिम निर्णय के करीब बताया जा रहा है।
कुछ मुद्दों पर अभी भी जारी है मंथन
हालांकि योजना का प्रारूप काफी हद तक तैयार माना जा रहा है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर अभी भी विचार किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से यह तय किया जाना है कि तीनों सेनाओं के संसाधनों, मानवबल और अधिकारों का विभाजन किस प्रकार किया जाएगा तथा नई कमांड संरचना में जिम्मेदारियां कैसे निर्धारित होंगी।
सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
रक्षा मंत्रालय के स्तर पर इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो यह भारतीय रक्षा व्यवस्था में पिछले कई दशकों के सबसे बड़े संरचनात्मक सुधारों में से एक माना जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और आधुनिक सैन्य चुनौतियों को देखते हुए संयुक्त कमांड प्रणाली भविष्य में भारतीय सशस्त्र बलों की संचालन क्षमता को और अधिक मजबूत बना सकती है।







