भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश, भूस्खलन और जलभराव की आशंका को लेकर चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय बना हुआ है, जिसके चलते पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार वर्षा होने की संभावना है।
मौसम विभाग ने विशेष रूप से कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर और किन्नौर जिलों में भूस्खलन और मलबा खिसकने का खतरा जताया है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
जलस्तर बढ़ने की भी आशंका
आईएमडी के अनुसार, लगातार बारिश के कारण नदियों, नालों और अन्य जल स्रोतों का जलस्तर बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों से अपील की गई है कि वे नदी-नालों के किनारे जाने से बचें और संवेदनशील इलाकों में अनावश्यक आवाजाही न करें।
प्रशासन को भी संभावित आपदा की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां रखने की सलाह दी गई है।
अगले 5 से 7 दिनों तक सक्रिय रहेगा मानसून
मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले 5 से 7 दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा। कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों में लगभग प्रतिदिन कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जुलाई के मध्य तक राज्य में वर्षा का यह दौर जारी रह सकता है। इसके बाद बारिश की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है, हालांकि मौसम में बदलाव स्थानीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए सलाह
मौसम विभाग ने पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटकों से मौसम का ताजा अपडेट लेने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। भूस्खलन संभावित मार्गों पर यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा, तेज बारिश के दौरान पहाड़ी ढलानों, नदी-नालों और कमजोर चट्टानी क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने को कहा गया है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
लगातार बारिश की संभावना को देखते हुए संबंधित जिलों में प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों को भी सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान सतर्कता और समय पर जारी मौसम चेतावनियों का पालन करना ही संभावित जोखिम को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।








