वायनाड टनल हादसे से पहले मिली थी चेतावनी, आंतरिक रिपोर्ट में ढलान कभी भी ढहने की जताई गई थी आशंका

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केरल के वायनाड में निर्माणाधीन टनल परियोजना पर हुआ भूस्खलन, जिसमें छह लोगों की जान चली गई, अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हादसे के बाद सामने आई एक आंतरिक तकनीकी रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि जिस ढलान पर यह दुर्घटना हुई, उसकी स्थिति पहले से ही चिंताजनक थी और विशेषज्ञों ने समय रहते इसके अस्थिर होने की आशंका व्यक्त की थी।

रिपोर्ट के अनुसार, टनल के उत्तरी प्रवेश द्वार (नॉर्थ पोर्टल) के ऊपर स्थित पहाड़ी की विस्तृत भू-वैज्ञानिक और भू-तकनीकी जांच की गई थी। निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने पाया कि इस हिस्से में कठोर चट्टानों के ऊपर लगभग 35 मीटर मोटी ढीली और महीन मिट्टी की परत मौजूद थी। ऐसी मिट्टी में बारिश का पानी आसानी से नहीं निकलता, जिससे नमी बढ़ने पर ढलान कमजोर पड़ने लगती है।

निरीक्षण में सामने आए कई चेतावनी संकेत

रिपोर्ट में बताया गया कि निरीक्षण के दौरान ढलान पर कई जगह दरारें दिखाई दीं। कुछ हिस्सों में मिट्टी खिसकने लगी थी, जबकि कई स्थानों से पानी का रिसाव भी देखा गया। विशेषज्ञों ने मिट्टी के भीतर खाली स्थान बनने और भूमिगत जल प्रवाह के संकेत भी दर्ज किए।

रिपोर्ट के मुताबिक, भूमिगत बहता पानी धीरे-धीरे मिट्टी को अंदर से कमजोर कर सकता है। ऐसी स्थिति में बाहरी सतह सामान्य दिखाई देने के बावजूद अचानक बड़ा भूस्खलन होने का खतरा बना रहता है।

भारी बारिश को बताया गया प्रमुख जोखिम

तकनीकी टीम ने विशेष रूप से चेतावनी दी थी कि लगातार हो रही बारिश के कारण ढलान की स्थिरता और कमजोर हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया कि यदि मौसम की यही स्थिति बनी रहती है, तो संबंधित ढलान किसी भी समय अचानक ध्वस्त हो सकती है।

विशेषज्ञों ने यह भी उल्लेख किया कि टनल के दोनों ओर की ढलानों में समान जोखिम नहीं था। बाईं ओर की ढलान को अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील और अस्थिर बताया गया था।

हादसे के बाद उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

भूस्खलन में छह लोगों की मौत के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि संभावित खतरे के संकेत पहले ही सामने आ चुके थे, तो क्या आवश्यक सुरक्षा उपाय समय पर लागू किए गए थे। परियोजना से जुड़े तकनीकी दस्तावेजों और सुरक्षा प्रक्रियाओं की समीक्षा की मांग भी तेज हो गई है।

जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल संबंधित एजेंसियां हादसे के कारणों की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना केवल प्राकृतिक कारणों से हुई या सुरक्षा मानकों के पालन में भी कोई कमी रही। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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