नीट (NEET) समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों के साथ व्यवस्था ने विश्वासघात किया है और उनके भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत में थरूर ने कहा कि जिन छात्रों ने वर्षों तक कड़ी मेहनत कर परीक्षा की तैयारी की, उन्हें ऐसी व्यवस्था पर भरोसा था जो निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करेगी। लेकिन बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने उस भरोसे को गहरा आघात पहुंचाया है।
“लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना अपराध नहीं”
शशि थरूर ने विपक्ष के नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक और जनप्रतिनिधि का अधिकार है।
उनके अनुसार, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य नेताओं को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लेना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती इस बात से तय होती है कि वह असहमति की आवाज को किस तरह सुनता और संभालता है।
छात्रों के साथ पुलिस कार्रवाई पर जताई चिंता
थरूर ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कई छात्रों ने उन्हें बताया कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ बल प्रयोग किया गया और उन्हें धक्का-मुक्की तथा लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि यदि छात्र अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठा रहे हैं, तो प्रशासन को उनकी बात सुननी चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर संवाद का रास्ता अपनाना अधिक प्रभावी होगा।
जंतर-मंतर पर जारी है विरोध प्रदर्शन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठन और विभिन्न सामाजिक समूह लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग पेपर लीक मामलों में निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की है।
इसी मुद्दे को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी अनशन पर बैठे हुए हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठा रहे हैं।
पेपर लीक बना राष्ट्रीय बहस का मुद्दा
पेपर लीक का मुद्दा अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद में भी इसे लेकर लगातार बहस हो रही है। विपक्ष सरकार से इस मामले पर विस्तृत जवाब और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नए कदम उठाए जा रहे हैं।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घोषणा की थी कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे, ताकि ऐसे मामलों का जल्द निपटारा हो सके और दोषियों को समयबद्ध तरीके से सजा मिल सके।
छात्रों की सबसे बड़ी चिंता
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आने से लाखों छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा प्रभावित होता है। उनका मानना है कि केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना भी आवश्यक है।








