झारखंड में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने खत्म की भूख हड़ताल, सरकार के फैसले के बाद लिया बड़ा फैसला

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झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सोमवार देर शाम अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। यह फैसला झारखंड सरकार की ओर से सरकारी नौकरियों से जुड़ी परीक्षाओं और भर्तियों को रद्द करने की घोषणा के कुछ घंटे बाद लिया गया।

देवेंद्र नाथ महतो पिछले कई दिनों से परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। लंबे समय तक चले अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

मंत्रियों और विधायकों से मुलाकात के बाद खत्म किया अनशन

अस्पताल में इलाज के दौरान कुछ मंत्री और विधायक देवेंद्र नाथ महतो से मिलने पहुंचे। सरकार की ओर से लिए गए फैसले और जांच की प्रक्रिया पर चर्चा के बाद महतो ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।

भूख हड़ताल खत्म करने के बाद छात्र नेता ने सरकार के फैसले के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है और छात्रों का उद्देश्य व्यवस्था में मौजूद भ्रष्टाचार को खत्म करना है।

महतो ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार के साथ सहयोग करेंगे। उनका कहना है कि सिर्फ मौजूदा मामलों की जांच करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य में पेपर लीक और दूसरी अनियमितताओं को रोकने के लिए ऐसी मजबूत व्यवस्था तैयार करनी होगी, जिससे छात्रों को दोबारा आंदोलन करने की जरूरत न पड़े।

‘असल मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश’

समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि जांच एजेंसियां उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं, जिन्हें परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुख्य जिम्मेदार माना जा रहा है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि छात्रों की लड़ाई केवल किसी एक परीक्षा या भर्ती तक सीमित नहीं है। छात्र चाहते हैं कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद बने।

महतो ने कहा कि उनके सामने ऐसे कई मामले रहे हैं, जिनमें CBI या CID जांच के आदेश दिए गए, लेकिन बाद में जांच को रोक दिया गया। इसलिए उनकी मांग है कि सरकार ऐसी स्थायी व्यवस्था बनाए, जिससे पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी की घटनाओं पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सके।

हेमंत सोरेन सरकार ने रद्द की परीक्षाएं और भर्तियां

देवेंद्र नाथ महतो की भूख हड़ताल समाप्त होने से कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा ऐलान किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी नौकरियों से संबंधित कई परीक्षाओं और भर्तियों को रद्द किया जा रहा है।

इस फैसले के दायरे में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (CGL) समेत सरकारी नौकरी से जुड़ी परीक्षाएं और भर्तियां शामिल हैं।

सरकार के इस फैसले के बाद लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच प्रतिक्रिया देखने को मिली। छात्र संगठनों की ओर से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, पेपर लीक पर रोक और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग लगातार उठाई जा रही थी।

आगे क्या होगा?

अब सबसे बड़ी चुनौती झारखंड की परीक्षा और भर्ती व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की होगी। छात्रों की मांग है कि परीक्षा आयोजित करने से लेकर प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने तक पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए।

देवेंद्र नाथ महतो ने भी संकेत दिया है कि छात्र सरकार की ओर से किए जा रहे सुधारों में सहयोग करेंगे। हालांकि, छात्रों की नजर अब जांच के नतीजों और भविष्य में होने वाली परीक्षाओं की नई व्यवस्था पर रहेगी।

सरकार के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि रद्द की गई परीक्षाओं और भर्तियों के संबंध में सरकार क्या नई प्रक्रिया अपनाती है और परीक्षा में अनियमितताओं को रोकने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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