पतंजलि योगपीठ के महामंत्री और योग गुरु बाबा रामदेव के करीबी सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को फर्जी पासपोर्ट मामले में बड़ी राहत मिली है। देहरादून की तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए उन्हें बरी कर दिया है।
आचार्य बालकृष्ण पर आरोप था कि उन्होंने कथित तौर पर फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल किया था। इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने की थी।
फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र से जुड़ा था मामला
सीबीआई की जांच के अनुसार, आचार्य बालकृष्ण ने वर्ष 1997 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के खुर्जा स्थित श्री राधा कृष्ण संस्कृत महाविद्यालय से कथित तौर पर फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। जांच एजेंसी का आरोप था कि इन प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल आगे की दस्तावेजी प्रक्रिया में किया गया।
सीबीआई ने इस मामले में महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य प्रोफेसर नरेश द्विवेदी को भी सह-आरोपित बनाया था। जांच में यह आरोप लगाया गया था कि प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका थी।
मामले में पहले हुई थी गिरफ्तारी
फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच के दौरान आचार्य बालकृष्ण को सीबीआई ने पूर्व में गिरफ्तार भी किया था। मामला सामने आने के बाद लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चली और अदालत में जांच एजेंसी की ओर से आरोपों तथा संबंधित दस्तावेजों को रखा गया।
हालांकि, अब तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाते हुए आचार्य बालकृष्ण को आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत के इस फैसले से उनके खिलाफ चल रहे इस मामले का कानूनी रूप से महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री हैं बालकृष्ण
आचार्य बालकृष्ण पतंजलि योगपीठ से लंबे समय से जुड़े हुए हैं और संगठन में महामंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हैं। वह बाबा रामदेव के प्रमुख सहयोगियों में भी गिने जाते हैं।
फर्जी पासपोर्ट मामले में अदालत के फैसले के बाद अब आचार्य बालकृष्ण को बड़ी कानूनी राहत मिली है। मामले में अदालत के विस्तृत आदेश और फैसले के आधार पर आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।








