BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत सदस्य देशों के नेताओं ने एक साथ तस्वीर खिंचवाई। सम्मेलन में वैश्विक राजनीति, मध्य पूर्व के संघर्ष, आतंकवाद, व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान सदस्य देशों ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। भारत की मेजबानी में हुई कूटनीतिक कोशिशों के बाद ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त घोषणा पर सहमति बनी। इससे पहले मई में नई दिल्ली में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में मध्य पूर्व के युद्ध को लेकर मतभेदों के कारण संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका था।
मोदी के साथ पुतिन और शी जिनपिंग की तस्वीर
ब्रिक्स सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीच में खड़े नजर आए, जबकि उनके दोनों ओर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत अन्य देशों के नेता मौजूद थे। सम्मेलन में शामिल नेताओं की यह तस्वीर ब्रिक्स के सामूहिक मंच पर एकता और सहयोग का संदेश देती है।
इस बैठक में 11 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चीन, रूस, ईरान और भारत समेत समूह के अन्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
मध्य पूर्व के तनाव पर जारी हुआ संयुक्त बयान
ब्रिक्स देशों ने मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। संयुक्त घोषणा में सदस्य देशों ने सभी संबंधित पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की, जिनसे स्थिति और बिगड़ सकती है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता और संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत तथा कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया।
संयुक्त बयान जारी करने के लिए भारत की ओर से व्यापक कूटनीतिक प्रयास किए गए। इससे पहले मई में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच युद्ध को लेकर मतभेद सामने आए थे।
पीएम मोदी ने दी सर्वसम्मति से घोषणा की जानकारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स की नई दिल्ली घोषणा 2026 को सर्वसम्मति से अपनाए जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी सदस्य देश ने आपत्ति नहीं जताई और घोषणा को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।
इस सहमति को ब्रिक्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि समूह में अलग-अलग राजनीतिक और आर्थिक हितों वाले देश शामिल हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय संघर्ष और व्यापार जैसे मुद्दों पर साझा रुख बनाना सदस्य देशों के बीच कूटनीतिक सहयोग को दर्शाता है।
ईरान के राष्ट्रपति भी सम्मेलन में शामिल
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। सम्मेलन में शामिल होने से पहले उन्होंने मध्य पूर्व में अमेरिकी भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा था कि क्षेत्र को किसी अमेरिकी “क्षेत्रीय पुलिसकर्मी” की जरूरत नहीं है।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तथा क्षेत्रीय संघर्ष के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है। सम्मेलन के दौरान पेजेशकियन ने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी मुलाकात की।
BRICS की अध्यक्षता कर रहा है भारत
भारत वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इस वर्ष की अध्यक्षता का मुख्य विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा गया है।
इस थीम के तहत ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग, तकनीकी विकास, स्थिरता और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वय बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
ब्रिक्स की स्थापना वर्ष 2009 में प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मंच के रूप में हुई थी। इसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका को मजबूत करना है।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख
नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा की गई। सदस्य देशों ने सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने जैसी चुनौतियों पर चिंता जताई।
घोषणा में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की भी निंदा की गई। ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता, जवाबदेही तय करने और संयुक्त राष्ट्र के व्यापक आतंकवाद निरोधक सम्मेलन को जल्द अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सदस्य देशों ने आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की प्रतिबद्धता दोहराई।
वित्तीय अपराध और अवैध तस्करी पर चिंता
ब्रिक्स देशों ने मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों, हथियारों की तस्करी, आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण और संगठित अपराध से जुड़े अवैध वित्तीय लेनदेन पर भी चिंता जताई।
घोषणा में ऐसे अवैध धन प्रवाह को रोकने के लिए सीमा पार सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई गई। सदस्य देशों का कहना है कि वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए संबंधित संस्थाओं के बीच सूचनाओं और कार्रवाई का बेहतर समन्वय जरूरी है।
व्यापार पर एकतरफा शुल्क नीतियों की आलोचना
ब्रिक्स देशों ने व्यापार में बढ़ती एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं पर गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि ऐसी नीतियां वैश्विक व्यापार को प्रभावित करती हैं और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।
घोषणा में बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। सदस्य देशों ने WTO के विवाद निपटान तंत्र को पूरी तरह सक्रिय करने और अपीलीय निकाय के सदस्यों की नियुक्ति की मांग की।
ब्रिक्स देशों ने एकतरफा आर्थिक और द्वितीयक प्रतिबंधों की भी आलोचना की। घोषणा में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत लगाए गए एकतरफा दंडात्मक उपायों को समाप्त किया जाना चाहिए, क्योंकि ये संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और उद्देश्यों को कमजोर करते हैं।
संवाद और कूटनीति को बताया समाधान का रास्ता
नई दिल्ली घोषणा में क्षेत्रीय संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत, परामर्श और कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही गई। सदस्य देशों ने कहा कि विवादों के मूल कारणों को समझना और संघर्ष की रोकथाम के लिए समय रहते कदम उठाना जरूरी है।
ब्रिक्स देशों ने आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता, समावेशिता और सर्वसम्मति के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग, आर्थिक तथा वित्तीय सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया।
निष्कर्ष
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन भारत की कूटनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण रही। मध्य पूर्व के तनाव पर संयुक्त बयान, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और व्यापार नीतियों पर साझा चिंता ने सम्मेलन के प्रमुख परिणामों को सामने रखा। प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की साथ में तस्वीर ने भी सम्मेलन की प्रमुख झलकियों में अपनी जगह बनाई।








