28 सितंबर 2026: पंजाब राज्य महिला आयोग ने दो अलग-अलग विश्वविद्यालयों में महिला छात्रों से जुड़े गंभीर मामलों का स्वतः संज्ञान (suo motu cognisance) लिया है। इनमें Lovely Professional University (LPU) में छात्रा से दुष्कर्म के आरोप और Chitkara University में एक छात्रा की कथित आत्महत्या का मामला शामिल है।
आयोग ने दोनों मामलों की परिस्थितियों और संबंधित संस्थानों तथा प्रशासन की कार्रवाई की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
LPU मामले में दुष्कर्म के आरोप
LPU से जुड़े मामले में एक छात्रा के साथ दुष्कर्म के आरोप सामने आए हैं। मामले को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की ओर से विरोध-प्रदर्शन भी किया गया।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को कथित घटना की जानकारी मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
हालांकि, इन आरोपों और घटनाक्रम की पूरी स्थिति आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट तथा संबंधित जांच से स्पष्ट होगी। महिला आयोग अब यह देखेगा कि घटना की जानकारी विश्वविद्यालय को कब मिली, उसके बाद संस्थान ने क्या कदम उठाए और पुलिस तथा जिला प्रशासन ने मामले में किस तरह कार्रवाई की।
महिला आयोग ने DC और SSP से मांगी जानकारी
पंजाब राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष राज लाली गिल ने बताया कि आयोग ने दोनों घटनाओं का स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
रिपोर्ट में मुख्य रूप से घटनाओं की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई, प्रशासनिक कदम और विश्वविद्यालय प्रबंधन की प्रतिक्रिया से संबंधित जानकारी मांगी गई है।
आयोग संबंधित जिलों के Deputy Commissioner (DC) और Senior Superintendent of Police (SSP) से रिपोर्ट प्राप्त करेगा। इन रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद आयोग आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लेगा।
चितकारा यूनिवर्सिटी में छात्रा की मौत
दूसरा मामला Chitkara University से जुड़ा है। यहां एक छात्रा के लापता होने की सूचना के बाद बाद में उसका शव बरामद हुआ। प्रारंभिक तौर पर इसे आत्महत्या का मामला बताया गया है।
महिला आयोग इस मामले में भी घटना की पूरी परिस्थितियों की जानकारी हासिल करेगा। आयोग यह जानने का प्रयास करेगा कि छात्रा के सामने किसी तरह की परेशानी या शिकायत थी या नहीं और यदि ऐसी कोई समस्या थी, तो क्या वह विश्वविद्यालय प्रबंधन के संज्ञान में लाई गई थी।
इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि यदि छात्रा या अन्य विद्यार्थियों की ओर से किसी प्रकार की शिकायत या चिंता व्यक्त की गई थी, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस पर क्या कार्रवाई की।
विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका भी जांच के दायरे में
दोनों मामलों में महिला आयोग का फोकस केवल घटना तक सीमित नहीं रहेगा। आयोग संबंधित रिपोर्टों के आधार पर यह भी देखेगा कि:
- विश्वविद्यालय प्रशासन को घटना की जानकारी कब मिली।
- जानकारी मिलने के बाद प्रबंधन ने क्या कदम उठाए।
- पुलिस को कब और किस स्तर पर सूचना दी गई।
- जिला प्रशासन ने मामले में क्या कार्रवाई की।
- छात्रों या छात्राओं की ओर से पहले कोई शिकायत दर्ज कराई गई थी या नहीं।
- यदि शिकायत की गई थी, तो उसका निपटारा किस तरह किया गया।
- परिसर में छात्रों की सुरक्षा और शिकायतों के समाधान के लिए क्या व्यवस्था मौजूद है।
रिपोर्ट मिलने के बाद तय होगा अगला कदम
महिला आयोग ने फिलहाल संबंधित प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। आयोग इन रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय करेगा।
इसलिए अभी आयोग की ओर से दोनों मामलों में किसी अंतिम निष्कर्ष या जिम्मेदारी को लेकर फैसला नहीं किया गया है। पुलिस और प्रशासन की जांच तथा विश्वविद्यालयों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर घटनाओं की वास्तविक परिस्थितियों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
छात्र सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल
इन घटनाओं ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र सुरक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था और गंभीर आरोपों पर संस्थागत प्रतिक्रिया को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।
विश्वविद्यालय परिसरों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए ऐसी व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसमें किसी गंभीर शिकायत की स्थिति में वे सुरक्षित तरीके से अपनी बात संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकें और शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई हो।
पंजाब महिला आयोग की ओर से मांगी गई रिपोर्ट के बाद अब दोनों विश्वविद्यालयों से जुड़े मामलों में प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई की जानकारी सामने आने का इंतजार है। आयोग रिपोर्टों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।








