Narendra Modi ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के मद्देनजर देश की बिजली व्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में ऊर्जा मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित संकट की स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतों को सुचारु रूप से बनाए रखना था।
बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिजली उत्पादन, ईंधन आपूर्ति और वितरण व्यवस्था में किसी भी तरह की बाधा न आने दी जाए।
बैठक में Ministry of Power और Ministry of Petroleum and Natural Gas के अधिकारियों ने मौजूदा स्थिति और भविष्य की तैयारियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसमें बताया गया कि देश में फिलहाल बिजली उत्पादन पर्याप्त है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने इस दौरान यह भी कहा कि सभी पावर प्लांट्स को पर्याप्त कोयला और गैस उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उत्पादन प्रभावित न हो। साथ ही राज्यों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने और बिजली की मांग-आपूर्ति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है that अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन लागत और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार का यह कदम समय रहते उठाया गया एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
बैठक में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा जैसे विकल्पों को तेजी से विकसित करना चाहिए, ताकि भविष्य में बाहरी निर्भरता कम की जा सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में बिजली की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और आम जनता को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए सरकार पूरी तरह सतर्क बनी हुई है।









