Narendra Modi का यूरोप दौरा इस समय अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नीदरलैंड पहुंच चुके हैं, जहां वह कई उच्चस्तरीय बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार, तकनीक, रक्षा, हरित ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना बताया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर नई गति देखने को मिली है। इसके अलावा भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हुए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट के बाद दोनों पक्ष आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का नीदरलैंड दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह यहां डच प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और साथ ही राजा Willem-Alexander तथा रानी Máxima से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा भारतीय समुदाय और प्रमुख कारोबारी नेताओं के साथ भी उनकी बैठकें प्रस्तावित हैं।
भारत और नीदरलैंड के संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। पहले जहां दोनों देशों का सहयोग मुख्य रूप से व्यापार, कृषि, जल प्रबंधन और स्वास्थ्य तक सीमित था, वहीं अब तकनीक, रक्षा, सेमीकंडक्टर, समुद्री सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ रही है।
इस दौरे के दौरान एक महत्वपूर्ण समझौते की भी उम्मीद जताई जा रही है। खबरों के मुताबिक Tata Electronics और डच चिप उपकरण निर्माता ASML के बीच गुजरात के धोलेरा में बनने वाले सेमीकंडक्टर प्लांट को लेकर बड़ा करार हो सकता है। यदि यह समझौता होता है तो भारत के सेमीकंडक्टर निर्माण अभियान को बड़ी मजबूती मिलेगी।
नीदरलैंड के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन जाएंगे, जहां वह भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। Sweden के साथ भारत के संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, हरित ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन, रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
स्वीडिश रक्षा कंपनी Saab द्वारा हरियाणा में कार्ल-गुस्ताफ हथियार निर्माण इकाई स्थापित करना भारत-स्वीडन रक्षा सहयोग का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। यह स्वीडन के बाहर साब की पहली ऐसी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। कई यूरोपीय देश अब अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और एशियाई देशों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। भारत को एक बड़े बाजार, तकनीकी साझेदार और रणनीतिक सहयोगी के रूप में देखा जा रहा है।








