पश्चिम बंगाल ने विधानसभा चुनाव में मतदान का नया इतिहास रच दिया है। चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य में इस बार 93.71 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो आज़ादी के बाद किसी भी राज्य के विधानसभा चुनाव में अब तक का सबसे अधिक मतदान माना जा रहा है। इससे पहले यह रिकॉर्ड त्रिपुरा के नाम था, जहां 2013 के विधानसभा चुनाव में 93.61 प्रतिशत मतदान हुआ था।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड मतदान केवल चुनावी उत्साह नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता और राजनीतिक भागीदारी का संकेत भी है। चुनाव के दौरान राज्य में भारी गर्मी, लंबी कतारें और कई इलाकों में तनावपूर्ण माहौल के बावजूद लोगों ने बढ़-चढ़कर मतदान किया।
West Bengal में इस बार चुनाव दो चरणों में आयोजित किए गए थे। राज्य में कुल लगभग 3.6 करोड़ मतदाता थे और मतदान के दिन सुबह से ही बूथों पर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। खास बात यह रही कि महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही। पहले चरण में महिला मतदाताओं की भागीदारी 92.69 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि पुरुष मतदाताओं की भागीदारी 90.92 प्रतिशत रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी भारतीय लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं में राजनीतिक जागरूकता तेजी से बढ़ी है और वे अब चुनावी प्रक्रिया में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार पूर्वोत्तर राज्यों में पहले से ही मतदान प्रतिशत काफी अधिक रहा है। Tripura, Nagaland और Manipur जैसे राज्यों में लंबे समय से 90 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया जाता रहा है। लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल ने इन सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना दिया।
इस चुनाव में केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी देखने को मिली। Assam और Puducherry ने भी अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए। असम में 85.38 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.83 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं Tamil Nadu में 84.69 प्रतिशत मतदान हुआ, जो राज्य के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि देशभर में बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और सोशल मीडिया के प्रभाव ने भी लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया है। युवा मतदाताओं और पहली बार वोट डालने वालों में भी खास उत्साह देखा गया।
चुनाव आयोग ने रिकॉर्ड मतदान को लोकतंत्र के लिए उत्साहजनक बताया है। आयोग के अधिकारियों के अनुसार शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई थीं।
राजनीतिक दल भी इस रिकॉर्ड मतदान को अपने-अपने तरीके से देख रहे हैं। कुछ दल इसे सरकार के खिलाफ जनभावना बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे लोकतंत्र में जनता की मजबूत आस्था का प्रतीक मान रहे हैं।








