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भारत ने निर्यात के क्षेत्र में बनाया नया रिकॉर्ड, 863 अरब डॉलर के आंकड़े तक पहुंची कुल निर्यात क्षमता

वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक माहौल के बीच भारत ने निर्यात के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल निर्यात बढ़कर 863 अरब अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले एक दशक में भारत की निर्यात क्षमता में हुए उल्लेखनीय विस्तार को दर्शाता है और वैश्विक व्यापार में देश की बढ़ती भागीदारी का संकेत भी देता है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 में भारत का कुल निर्यात लगभग 468 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर 863 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस दौरान निर्यात में लगातार वृद्धि दर्ज की गई और विभिन्न क्षेत्रों ने इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन क्षमता में वृद्धि, नए बाजारों तक पहुंच और व्यापारिक समझौतों ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है।

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, माल (मर्चेंडाइज) निर्यात भी लगातार मजबूत हुआ है। पिछले वर्षों में भारतीय उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ने के कारण इंजीनियरिंग सामान, कपड़ा उद्योग, कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और औद्योगिक वस्तुओं के निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही सेवा क्षेत्र ने भी निर्यात वृद्धि में बड़ी भूमिका निभाई है।

विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल सेवाएं, वित्तीय सेवाएं और पेशेवर परामर्श जैसी सेवाओं की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने से सेवा निर्यात में उल्लेखनीय उछाल देखा गया। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का सेवा क्षेत्र अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक मजबूत पहचान बना चुका है और आने वाले वर्षों में इसके और विस्तार की संभावना है।

एक महत्वपूर्ण उपलब्धि गैर-पेट्रोलियम निर्यात के क्षेत्र में भी दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि भारत का निर्यात आधार केवल ऊर्जा या सीमित उत्पादों पर निर्भर नहीं है, बल्कि विभिन्न उद्योगों और उत्पाद श्रेणियों में उसका विस्तार हो रहा है। इससे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत हुई है।

व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत ने कई महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते किए हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव निर्यात पर दिखाई दे रहा है। इन समझौतों के माध्यम से भारतीय उत्पादों को विभिन्न देशों के बाजारों में बेहतर पहुंच मिली है। इससे निर्यातकों को नए अवसर प्राप्त हुए हैं और भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है।

कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को भी निर्यात वृद्धि का बड़ा लाभ मिला है। बासमती चावल, शहद, डेयरी उत्पाद, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ने से किसानों और कृषि आधारित उद्योगों को नए बाजार मिले हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

उद्योग जगत का मानना है कि निर्यात में वृद्धि केवल विदेशी मुद्रा अर्जित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार सृजन, औद्योगिक उत्पादन और निवेश को भी बढ़ावा देती है। जब किसी देश के उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक बिकते हैं, तो घरेलू उद्योगों का विस्तार होता है और नए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के सामने अब अगली चुनौती इस वृद्धि को दीर्घकालिक और टिकाऊ बनाना है। इसके लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, लॉजिस्टिक्स लागत कम करना, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना और वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन बढ़ाना आवश्यक होगा।

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