हरिद्वार। उत्तराखण्ड के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में अब योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक जीवनशैली के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता की नई लहर दिखाई देने लगी है। जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की महत्वाकांक्षी “जनजातीय आदि ग्राम परियोजना” के तहत चयनित 64 गांवों में पतंजलि दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट, हरिद्वार द्वारा व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक जागरूकता के कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
परियोजना का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना ही नहीं, बल्कि जनजातीय समाज को योग, आयुर्वेद, स्वच्छता और प्राकृतिक जीवनशैली से जोड़कर स्वस्थ और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करना है।
इसी क्रम में महिला पतंजलि योग समिति के सहयोग से ग्राम बनासखेड़ा में एक भव्य निःशुल्क योग शिविर आयोजित किया गया। शिविर में स्थानीय जनजातीय समुदाय के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की बड़ी संख्या ने योगाभ्यास में हिस्सा लेकर स्वास्थ्य के प्रति अपनी जागरूकता का परिचय दिया।
योग शिविर के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम, ध्यान और प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धतियों का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि योग केवल रोगों से मुक्ति का साधन नहीं, बल्कि शरीर, मन और जीवन को संतुलित बनाने की एक समग्र जीवनशैली है।

योगऋषि स्वामी रामदेव ने अपने संदेश में कहा कि
“योग भारत की प्राचीन और दिव्य जीवन पद्धति है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाती है। पतंजलि का संकल्प है कि योग का प्रकाश देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ स्वास्थ्य सुविधाएँ सीमित हैं।”
वहीं, आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि जनजातीय समाज भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का आधार है।
“ग्राम बनासखेड़ा में आयोजित यह योग शिविर जनजातीय समाज में सकारात्मक परिवर्तन और स्वस्थ जीवनशैली के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पतंजलि दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट जनजातीय आदि ग्राम परियोजना के माध्यम से उत्तराखण्ड के 64 गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता, योग, आयुर्वेद, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए सतत प्रयास कर रहा है।”
परियोजना के तहत चयनित गांवों में नियमित रूप से निःशुल्क योग शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, प्राकृतिक चिकित्सा परामर्श और जीवनशैली सुधार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का सीधा लाभ जनजातीय समुदाय को मिल रहा है और ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति नई जागरूकता विकसित हो रही है।
ग्राम बनासखेड़ा में आयोजित इस शिविर के बाद ग्रामीणों में योग और प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाने का उत्साह बढ़ा है। पतंजलि दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट को विश्वास है कि इस प्रकार की पहल से जनजातीय क्षेत्रों में स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की दिशा में मजबूत आधार तैयार होगा।









